देश के विदेशी मुद्रा बाजार में अभी तक केवल फ्यूचर सौदों की ही इजाजत है। लेकिन पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी मुद्रा के डेरिवेटिव उत्पादों का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसकी शुरुआत ऑप्शन सौदों से की जाएगी। यह बात आज सेबी के चेयरमैन सी बी भावे ने सिंगापुर में भारतीय वित्तीय बाजार पर आयोजित एक सम्मेलन में कही। इस सम्मेलन का आयोजन प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई (कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) ने किया था। भावेऔरऔर भी

मुझे लग रहा था कि बाजार आज से ही यू-टर्न ले लेगा। एफआईआई के रुख से भी ऐसा लग रहा था। कल जो बिकवाली चली, वह तो रूटीन कामकाज का हिस्सा थी जब एफआईआई और ऑपरेटर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं जिससे ट्रेडर व निवेशक डर जाएं। और, ऐसा करने में वे सफल भी रहे। मुझे अच्छे-खासे लोगों ने फोन करके कहा कि बाजार बैठने वाला है। दूसरी अफवाह यह चली कि मौद्रिक नीति मेंऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी यूलिप के बारे में 14 जीवन बीमा कंपनियों के खिलाफ जारी आदेश पर अमल की राह में कोई अड़चन नहीं आने देना चाहती। इसलिए उसने जिन भी खास-खास राज्यों में इन 14 कंपनियों के मुख्यालय हैं, उनके हाईकोर्ट के पहले से ही कैविएट दाखिल कर दिया है। यह कैविएट एक तरह की आपत्ति सूचना या याचिका है जिसके बाद कोई भी कोर्ट सेबी के आदेश के खिलाफ स्टे ऑर्डर नहीं जारी करऔरऔर भी

केवल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध कंपनी स्टाइलम इंडस्ट्रीज में कुछ तो खेल चल रहा है। कल इसका शेयर 40.95 पर बंद हुआ था। आज सुबह साढ़े नौ बजे के आसपास केवल दो शेयरों का सौदा हुआ और भाव गिरकर 39.20 पर आ गया। उसके बाद फिर अचानक 400 शेयरों का सौदा हुआ और भाव कूदकर 41.30 पर आ गए। इससे पहले बल्क सौदों में बडी डील 12 अप्रैल को एक लाख शेयरों की बिक्री कीऔरऔर भी

सेबी की अद्यतन जानकारी के मुताबिक उसके पास पंजीकृत विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों की संख्या 144 है। इसमें से 140 मॉरीशस के हैं। केवल चार अन्य देशों के हैं जिसमें से दो सिंगापुर के और दो ही साइप्रस के हैं। असल में विदेशी निवेशक कहीं का भी हो, वह अपने को मॉरीशस का इसलिए दिखाता है क्योंकि भारत और मॉरीशस मे हुई संधि के तहत उसे भारत में निवेश पर हुई कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ता।औरऔर भी

जो लोग अपने समय से बहुत आगे या पीछे होते हैं, वे ज्यादा नहीं जीते। और, जो लोग अपने समय के साथ चलते हैं, वे दार्घायु होते हैं। समय के साथ प्रकृति का यही करार है। दोनों का यही तालमेल है।और भीऔर भी