सरकार ने सचमुच में ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ ही डाला है। पशुओं के चारा विकास के लिए उसने प्रति पशु सिर्फ सवा दो रुपये का प्रावधान किया है। इसी मुट्ठी भर चारे से वह श्वेतक्रांति का स्वप्न देख रही है। जबकि दूध के मूल्य 45 से 50 रुपये प्रति किलो पहुंच गये है। हालात यही रहे तो नौनिहालों के मुंह का दूध भी छिन जाएगा। बजट में चारा विकास, उन्नतशील बीज, चारागाहों को बचाने और उनकेऔरऔर भी

पूंजी बाजार की नियामक संस्था सेबी और बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था आईआरडीए में अपने हलके को लेकर तलवारें खिंच चुकी हैं। अभी तक आईआरडीए को यकीन था कि जीवन बीमा कंपनियों की तरफ से जारी बीमा कवर व निवेश पर फायदे का लाभ देनेवाले यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) पर केवल उसी का नियंत्रण चलेगा। लेकिन शुक्रवार को देर शाम सेबी ने आदेश सुना दिया कि कोई भी बीमा कंपनी बिना उससे रजिस्ट्रेशन लिए न तोऔरऔर भी