सरकार ने मंगलवार को पहली बार मुद्रास्फीति के वो आंकड़े जारी किए जिनका वास्ता औद्योगिक खपत से नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता के जीवन से है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर नए साल के पहले महीने जनवरी में मुद्रास्फीति 7.65 फीसदी रही है। जनवरी माह की ही थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 6.55 फीसदी रही है। इस तरह उपभोक्ताओं के लिए मुद्रास्फीति की दर औद्योगिक खपत से 1.10 फीसदी ज्यादा है।
खास बात यह है कि जहां थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में खाद्य व मैन्यूफैक्चर्ड वस्तुओं के थोक मूल्य को भी शामिल किया गया है, वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में कृषि व औद्योगिक वस्तुओं के रिटेल मूल्य के साथ ही आवास व शिक्षा जैसी सेवाओं का मूल्य भी शामिल किया गया है। यह आम लोगों के लिए ज्यादा प्रासंगिक आंकड़ा है क्योंकि अर्थव्यवस्था या जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 फीसदी हो चुका है।
सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्यमंत्री श्रीकांत जेना ने सीपीआई पर आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों को जारी करते हुए कहा, ‘‘मंत्रालयों व विभिन्न तबकों से इसके लिए व्यापक मांग की जा रही थी। इसे पूरा करने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के तहत सालाना आधार पर जनवरी 2012 का मुद्रास्फीति आंकड़ा जारी किया गया है।’’ नया सीपीआई सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा तैयार किया जा रहा है और अंततः यह थोक मूल्य सूचकांक का स्थान ले लेगा।
नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के अर्थशास्त्री एन आर भानुमूर्ति का कहना है, “शुरू में रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति की निगरानी के लिए थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, दोनों के आंकड़ों पर नज़र रख सकता है। लेकिन बाद में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सत्यता व व्यापकता के स्थापित हो जाने के बाद वह उसी का सहारा लेगा।” हालांकि ऐसा होने में अभी थोड़ा वक्त लगेगा।
ताजा आंकड़ों के अनुसार सब्जियों की कीमत जनवरी माह में पिछले वर्ष के इसी माह के मुकाबले 24 फीसदी कम रही। हालांकि अन्य खाद्य व पेय पदार्थों की कीमत में तेजी दर्ज की गई। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में इस वर्ग की मुद्रास्फीति क्रमशः 4.18 फीसदी और 3.98 फीसदी रही। अखिल भारतीय स्तर पर कपड़ा, बेडिंग और फुटवियर क्षेत्र की महंगाई दर 14.25 फीसदी दर्ज की गई है। बहरहाल, सरकार ने आवास, शिक्षा व विविध जिंसों की खुदरा मुद्रास्फीति जारी नहीं की है।
मंत्रालय ने जनवरी 2011 से देशव्यापी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जारी करना शुरू किया है। उस समय मुद्रास्फीति के आंकड़े नहीं दिए गए थे। यह पहला मौका है जब सरकार ने ग्रामीण, शहरी और अखिल भारतीय स्तर पर खुदरा मूल्यों की मुद्रास्फीति जारी की है। सूचकांक के लिये आंकड़े 310 शहरों और 1180 ग्रामीण केंद्रों से इकट्ठा किए जा रहे हैं।
