चुनावों के नतीजे यकीनन दो-चार, दस-पंद्रह दिन शेयर बाज़ार पर असर दिखाते हैं। लेकिन बाद में सब सामान्य हो जाता है। विदेशी निवेशकों के आने पर फर्क नहीं पड़ता, न ही घरेलू निवेशकों का जोश कमबेशी होता है। लंबे समय में भारत की विकासगाथा का दमखम बरकरार है तो शेयर बाज़ार तरन्नुम में उड़ता रहता है। केंद्र में एक दलीय बहुमत की सरकार हो या गठबंधन की सरकार हो, बाज़ार चहकता रहता है। अब बुधवार की बुद्धि…
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