दीपावली के बाद लैरी विलियम्स का प्रसंग फिर से। लैरी ऐसे विद्यार्थी की तलाश में थे, जो फाइनेंस की पृष्ठभूमि का न हो, जिसे वे अपनी तरह ट्रेडिंग का विश्व चैम्पियन बनने का गुर सिखा सकें। काफी मशक्कत के बाद उन्होंने अपनी ही बेटी मिशेल विलियम्स को चुना। मिशेल तब किशोरी थीं। हॉलीवुड व ब्रॉडवे नाट्य फोरम की प्रतिभाशाली नई अभिनेत्री व लेखिका। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ड्रामा और साहित्य की थी। फाइनेंस और अर्थशास्त्र की दुनिया सेऔरऔर भी

इस बार हफ्ते की शुरुआत दिवाली से। और, दिवाली पर रात को दीपों की माला सजाने से पहले शाम को होनी है बीएसई व एनएसई में एक घंटे की मुहूर्त ट्रेडिंग शाम 6.15 बजे से शाम 7.15 बजे तक। यह आगाज़ होगा नए सम्वत 2079 का। ब्लॉक डील का सत्र 5.45 बजे से 6 बजे तक चलेगा, जबकि प्री-ओपन सत्र 6 बजे से 6.08 बजे तक आठ मिनट का होगा। आपर जानते ही है कि मुहूर्त ट्रेडिंगऔरऔर भी

अस्सी साल के हो चुके लैरी विलियम्स बार-बार कहते आए हैं कि वे आज जो कुछ भी हैं, वो केवल और केवल वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग की बदौलत। उनका यह भी भरोसा है कि जो कोई भी दिल से ट्रेडिंग सीखना चाहता है, उसे ट्रेडिंग सिखाई जा सकती है। भारत में भी ट्रेडिंग सिखाने के कई नामी-गिरामी संस्थान और व्यक्ति हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि उनकी मंशा व मूल मकसद आम लोगों को ट्रेडिंग सिखाना नहीं,औरऔर भी

अमेरिका में रहनेवाले लैरी विलियम्स वित्तीय बाज़ार से जुड़ी ट्रेडिंग की दुनिया के बड़े नाम हैं। वे करीब 60 साल से फ्यूचर्स, कमोडिटीज़ व स्टॉक्स में ट्रेड करते रहे हैं। बहुत मुमकिन है कि हम हिंदीभाषी लोग उनके बारे में कुछ नहीं जानते हों। लेकिन वे ऐसे शख्स हैं जिन्होंने खुद कामयाबी हासिल करने के बाद साबित करके दिखाया कि ट्रेडिंग किसी को भी क्लास-रूम के विद्यार्थी की तरह सिखाई जा सकती है। लैरी धुरंधर लेखक वऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग का हुनर कोई पेट से सीखकर नहीं आता। इसे सीखना पड़ता है और इसे सीखा जा सकता है। दुनिया ऐसे उदाहरणों से भरी पड़ी है। अपने यहां भी हज़ारों लोग मिल जाएंगे जो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग व निवेश से घर-परिवार ही नहीं चलाते, बल्कि इसकी कमाई की बदौलत ऐशो-आराम से रहते हैं। डी-मार्ट के मालिक राधाकृष्ण दामाणी ने अपना सारा शुरुआती साम्राज्य शेयर बाज़ार से ही खड़ा किया। राकेश झुनझुनवाला अपने पीछेऔरऔर भी

हर ट्रेडर की चाहत व कोशिश यही रहती है कि उसका हर दिन मुनाफे का रहे। लेकिन हकीकत में ऐसा कहां हो पाता है! हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद बहुत-बहुत से कारक हमारे सोचे व चाहे लक्ष्य को पूरा नहीं होने देते। हम इन कारकों को तो नहीं बदल सकते। लेकिन खुद को बदल या पीछे ज़रूर खींच सकते हैं। जिस दिन आपका मूड खराब हो, घर में या बाहर किसी से झगड़ा किया हो, मन बहुतऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस लगता ही लगता है। इससे कोई नहीं बच सकता। अनुभवी ट्रेडर इसकी पूरी तस्दीक करेंगे। किसी दिन व हफ्ते में ज्यादा नुकसान होता है तो किसी दिन व हफ्ते में कम। अनुभवी व कुशल ट्रेडर की हरचंद कोशिश होती है इस घाटे को कम से कम करना। इसके लिए वह ऐसा सिस्टम बनाता है जो उसके टेम्परामेंट से मेल खाता है। ध्यान रखें कि आप जितना सहज होकर ट्रेड करेंगे, कामयाबीऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में सफलता के लिए दो चीजें बहुत ज़रूरी हैं। एक, घाटा कम से कम हो और दो, हम घाटे के सदमे से जल्दी से जल्दी बाहर निकल आएं। घाटा कम से कम रखने का एक तरीका यह है कि नए ट्रेडरों को स्टॉप-लॉस 2% से ज्यादा नहीं रखना चाहिए। मान लें कि कोई ट्रेडर महीने में दस में से चार सौदों में जीते और छह में हारे। चार में कम से कम 4-4%औरऔर भी

शेयर बाजार के ट्रेडरों की कामयाबी दर क्या है, यह उन्हें तो गिनना ही चाहिए, हमारी पूंजी बाजार नियामक सेबी को भी इसका हिसाब-किताब रखना चाहिए। तभी हम पतंगों की तरह इंट्रा-डे की तरफ उमड़े लाखों व्यक्तिगत ट्रेडरों को सही व व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा दे सकते हैं। यूरोप में तो बाकायदा नियम है। इसके तहत सभी ऑनलाइन ब्रोकरों को घोषित करना पड़ता है कि उनके क्लाएंट या ग्राहकों की कामयाबी दर कितनी रही है? आप जानकर चौंकऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस का सामना उस्ताद से उस्ताद ट्रेडर तक को करना पड़ता है। बता दें कि विश्वस्तर पर एक रॉबिन कप ट्रेडिंग चैम्पियनशिप होती है। इसके डेटाबेस में ट्रेडिंग और ट्रेडरों के बिजनेस का भरपूर डेटा मिल जाता है। इसके मुताबिक विश्व चैम्पियन स्तर के ट्रेडर बड़ी मुश्किल से 60% से ज्यादा की कामयाबी दर हासिल कर पाते हैं। मतलब, दस में से चार सौदों में उन्हें आम तौर पर घाटा या स्टॉप-लॉसऔरऔर भी