बाज़ार में दसियों हज़ार लोग होंगे जो अपनी आंखों या बुद्धि से ज्यादा कानों पर विश्वास करते हैं। वे अफवाहों पर खरीदते-बेचते हैं और खबर आने पर निकल जाते हैं। चुनाव नतीजों से पहले रात ग्यारह बजे कोलकाता से एक सज्जन का फोन आया कि कोई ‘खबर’ हो तो बताइए। मैंने कहा कि सुबह 8 बजे से सब साफ होने लगेगा। फिर अभी से काहे की हड़बड़ी। हड़बड़ाइये मत, भावों का भाव पढ़िए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो तर्क से चलता है, उसे आप दाएं-बाएं करके पकड़ सकते हैं। पर जो भावना से चलता है, उसे तर्क से पकड़ना बेहद मुश्किल है। और, शेयर बाज़ार तर्क से कम और भावना से ज्यादा चलता है। कल हमने अभ्यास के लिए तीन स्टॉक्स डीएलएफ, मारुति और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पेश किए। तर्क कहता था कि डीएलएफ जैसा कमज़ोर स्टॉक तो अब मुनाफावसूली का शिकार हो ही जाएगा। लेकिन वो तो 7.83% चढ़ गया। अब वार मंगल का…औरऔर भी

2004 के लोकसभा नतीजों के बाद बाज़ार 17% गिरा। 2009 के नतीजों के बाद 17% बढ़ा। वहीं 2014 के बम्पर नतीजों के बावजूद निफ्टी केवल 1.12% बढ़ा। हालांकि पिछले तीन महीनों में करीब 20% पहले ही बढ़ चुका था। लेकिन अभी सब कुछ शांत भाव से हो रहा है। पहले जैसी हड़बोंग नहीं। मोदी सरकार अगले तीन महीनों में क्या फैसले करती है, इसी से बाज़ार का भरोसा टिकेगा या टूटेगा। अब बदले ज़माने का पहला वार…औरऔर भी

उत्साह का आलम। नई शुरुआत। बाज़ार को मनमांगी मुराद मिल गई तो सेंसेक्स व निफ्टी नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर। ऐसे में निवेश तो बनता है। पर सबसे बड़ी चुनौती है कि किस शेयर में? इसे सुलझाने के लिए जितना बड़ा रिसर्च सेटअप चाहिए, उसमें हर महीने पांच-दस लाख डालने होंगे। फिर भी हम यहां-वहां से जुगाड़ कर 200 रुपए/माह में चार शेयर बता रहे हैं। उठाएं इस सस्ती व भरोसेमंद सेवा का लाभ। अब आज की कंपनी…औरऔर भी

तैयारी हर तरफ है। वित्त मंत्रालय सेबी व रिजर्व बैंक समेत शीर्ष वित्तीय नियामकों की बैठक कर चुका है। शेयर बाज़ार व बांड बाज़ार को संभालने की खास तैयारियां हैं। बैकों को खासतौर पर हिदायत दी गई है कि बड़ी लांग पोजिशन लेने से बचें। अनिश्चितता के बीच आशंका! कहीं 17 मई 2004 या 16 मई 2009 जैसा हाल न हो जाए जब बाज़ार ने जबरदस्त तूफान मचाया था। इस बार क्या रहेगा उपयुक्त, देखते हैं आगे…औरऔर भी

कंपनियों के विज्ञापन और नेताओं के बयान में ज्यादा फर्क नहीं होता। एक नेताजी बोले कि देश में अच्छे दिन आ गए। इसका सबूत है कि शेयर बाज़ार इतना चढ़ गया। लेकिन बाज़ार तो इसलिए बढ़ा है क्योंकि विदेशियों ने झटपट मुनाफा कमाने के लिए शुक्र से लेकर अब तक इसमें 6033.04 करोड़ डाले हैं, जबकि देशी संस्थाओं ने 1042.17 करोड़ निकाले हैं। विदेशी कमाएं, देशी लुटाएं तो अच्छे दिन कैसे? खैर, हम चलें गुरु की डगर…औरऔर भी

आज बुद्धपूर्णिमा है। इस मौके पर शेयर बाज़ार खुला है, लेकिन सेटलमेंट बंद है। इसलिए कैपिटल सेगमेंट में कल किए गए सौदों का सेटलमेंट आज नहीं, बल्कि बुधवार के सौदों के साथ शुक्रवार को होगा। वैसे, बुद्ध का जिक्र आया तो बता दें कि वे कृष्ण या राम जैसे भगवान नहीं, हमारे-आप जैसे इंसान थे। उनके जैसा शांत मन और तर्क-पराणयता मिल जाए तो ट्रेडिंग में हम कभी लस्त-पस्त नहीं हो सकते। पकड़ते हैं बुध की बौद्ध-दृष्टि…औरऔर भी

एग्जिट पोल के नतीजे शाम 6.30 बजे से आना शुरू हुए। लेकिन बाज़ार को इससे तीन घंटे पहले ही इन नतीजों का आभास मिल गया था और सेंसेक्स व निफ्टी दोनों ही नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए। यह शुद्ध सट्टेबाज़ी का असर है या एग्जिट पोल के नतीजे न्यूज़ चैनलों ने पहले ही बाज़ार को लीक कर दिए, पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इसकी जांच कर रही है। इस भयंकर सट्टेबाज़ी के मद्देनज़र देखते हैं बाज़ार…औरऔर भी

ट्रेडिंग हम इसलिए करना चाहते हैं ताकि पैसा बना सकें। पैसा इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि दुनिया में अपने व अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि और सुरक्षा के साधन जुटा सकें। आम व्यापार में लोगों तक उनके काम की चीजें पहुंचाकर हम मूल्य-सृजन करते हैं। लेकिन क्या शेयरों की ट्रेडिंग से ऐसा मूल्य-सृजन होता है? इसमें तो पैसा एक की जेब से निकलकर दूसरे के पास ही पहुंचता है! गंभीरता से सोचिए। नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी