फाइनेंस की दुनिया खतरों से भरी पड़ी है। जगह-जगह शिकारी घात लगाए बैठे हैं जो मासूम लोगों की लालच का फायदा उठाकर एकदम वैधानिक तरीके से उनकी गाढ़ी बचत लूट ले जाते हैं। फॉरेक्स से लेकर कमोडिटी व स्टॉक्स में ट्रेडिंग टिप्स के नाम पर तो भयंकर लूट मची है। महीने के 25,000 तक लेते हैं। हमारी कोशिश है कि आप इनसे बचें। इनका सार्थक व तर्कसंगत विकल्प बनने की कोशिश है हमारी। अब डगर मंगल की…औरऔर भी

सेल्समैन के लिए फेंकना ज़रूरी होता है। धंधा चलाने के लिए उसे ऐसी बातों तक का दावा करना पड़ता है जो उसके वश में नहीं हैं। लेकिन धंधे के गुण अगर उसके आंतरिक स्वभाव का हिस्सा बन गए तो वह सफल ट्रेडर नहीं बन सकता। कारण, ट्रेडिंग में सफलता के लिए रिस्क लेते वक्त शांत रहना और सोच-समझकर फैसला करना पड़ता है। यहां बड़बोड़ापन या अतिविश्वास आपको घाटे में डुबो सकता है। पकड़ें अब सोमवार की नब्ज़…औरऔर भी

मित्र हैं, सरकारी अफसर हैं। शेयर बाज़ार का अच्छा-खासा अनुभव है। 2008 में जबरदस्त चपत के बाद गायब थे। इधर मई के बाद से उन्होंने शेयरों में करीब दस लाख रुपए डाले। चार महीने में करीब सवा लाख के फायदे से गदगद हैं। पोर्टफोलियो में 80 से ज्यादा शेयर। बताते हैं कि जो ठीकठाक लगा, लेते चले गए। लेकिन निवेश का यह तरीका ठीक नहीं। पोर्टफोलियो 40 स्टॉक्स तक सीमित रखें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

चीन की अर्थव्यवस्था सुस्त है। यूरो ज़ोन लम्ब-लेट है। जापान दूसरी तिमाही में डूबने लगा। ब्रिटेन में कमाई महंगाई के साथ नहीं बढ़ रही। यूक्रेन से इराक और गाज़ा तक अशांति फैली है। पश्चिम अफ्रीका में इबोला की महामारी का कहर है। फिर भी साइप्रस को छोड़ दें तो इस साल अब तक भारत में लिस्टेड कंपनियों का मूल्य या बाज़ार पूंजीकरण दुनिया में सबसे ज्यादा 33.54% बढ़ा है। उम्मीद पर टिके बाज़ार में राह शुक्रवार की…औरऔर भी

जो कोई शेयर बाज़ार को औद्योगिकीकरण से काटकर देखता है, वो सच्चाई से बहुत दूर हैं। और, जो भी सच्चाई से दूर रहता है, सच उससे इस अनदेखी की भरपूर कीमत वसूलता है। साथ ही चीजों को संपूर्णता में समझना होता है। सांस लेना और छोड़ना, लहर का उठना और गिरना। ऐसा उतार-चढ़ाव न हो तो जीवन ही न चले। ट्रेडिंग को जीवन की इसी लयताल के साथ जोड़कर समझिए। अब देखें पृष्ठभूमि गुरुवार की और आगे…औरऔर भी

ऐसा नहीं कि हर करोड़पति ट्रेडर एकदम बुद्ध बन गया होता है और रिटेल ट्रेडरों की तरह भावनाओं में बहकर नुकसान नहीं उठाता। लेकिन 100 करोड़ रुपए की कंपनी में 20 करोड़ की खरीद या बिक्री भावों की उलटपुलट के लिए अपने आप में काफी होती है। बाज़ार के हालात, उसका स्वरूप बराबर बदलता है। इसलिए कुशल ट्रेडर को अपनी रणनीति को बराबर मांजते रहना पड़ता है। एक रणनीति हमेशा काम नहीं आती। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

अपने यहां विदेशी व देशी संस्थाओं के साथ बड़े निवेशकों में आते हैं एचएनआई या हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल। डेरिवेटिव सेगमेंट में तो ये संस्थाओं पर भी भारी पड़ते हैं। कोटक वेल्थ मैनेजमेंट की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक 25 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेशयोग्य धन रखने वाले ऐसे लोगों की संख्या करीब 1.17 लाख हैं। इन्होंने अपने धन का करीब 38% इक्विटी में लगा रखा है। ट्रेडिंग रणनीति में इन पर भी रखें ध्यान। अब दिशा मंगल की…औरऔर भी

प्रोफेशनल ट्रेडर अगर छुट्टी पर न गया हो तो बाज़ार में नौसिखिया ट्रेडरों के जीतने की कोई गुंजाइश नहीं होती। प्रोफेशनल ट्रेडरों में मंजे हुए लोगों के साथ ही बैंक, एफआईआई, बीमा कंपनियों व म्यूचुअल फंडों के वेतन या कमीशन पर काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा अपने यहां कंपनी प्रवर्तकों से जुड़े इनसाइडर ट्रेडर भी सक्रिय हैं। लालच में यहां हाथ झुलाते घुस गए तो आपका लुटना तय है। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

गांव-देहात से लेकर शहर के तमाम लोग अब पढ़-लिखकर नौकरी का इंतज़ार करने की निरर्थकता समझने लगे हैं। उन्हें लगता है कि इससे तो बिजनेस करना ही ठीक है। पर बिजनेस में ज्यादातर लोगों की सोच व्यापार या दलाली से ऊपर नहीं जाती। जिनकी सोच इससे ऊपर जाती है उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं होती। ऐसे ही लोगों को बिजनेस में उतरने का मौका देता है बनी-बनाई कंपनियों के शेयरों में निवेश। आज ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

जमकर रिसर्च की। ट्रेडिंग के लिए स्टॉक चुना। सौदा किया, घाटा लगा। फिर सारा ज्ञान-ध्यान लगाया। लेकिन ट्रेड किया, फिर घाटा। ऐसा लगातार तीन-चार बार हो जाए तो मन में बैठ जाता है कि कहीं हमसे भारी चूक हो रही है या म्हारी किस्मत ही खोटी है। लेकिन लगातार घाटा सफलतम ट्रेडर भी खाते हैं। फर्क इतना है कि वे बाज़ार का मनमानापन मानते हैं; दिल नहीं डुबाते; औसत कमाई पर लगाते ध्यान। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी