बाज़ार में चीजों के दाम चलते, बढ़ते व गिरते क्यों रहते हैं? वे एक जगह चिपककर क्यों नहीं रहते? ऐसा इसलिए क्योंकि बाज़ार में उस चीज़ की मांग व सप्लाई में बराबर असंतुलन बना रहता है। संतुलन तक पहुंचते-पहुंचते फिर नया असंतुलन बन जाता है और भाव चल निकलते हैं। पुराने समय में भाप से चलनेवाले रेल इंजिनों के पहियों पर एक तरफ धातु का वक्र टुकड़ा लगाकर असंतुलन पैदा किया जाता था। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वैसे तो शेयर बाजार की ट्रेडिंग कच्चे दिलवालों या नौसिखिया लोगों के लिए नहीं है क्योंकि इसमें ऐसे घाघ व मंजे हुए खिलाड़ी घात लगाए बैठे हैं जो बेपरवाह व ‘नए मुल्लों’ को चुटकी में हज़म कर जाते हैं। इसलिए नए लोगों को अक्सर हमारी सलाह यही रहती है कि पहले आप साल-दो साल के निवेश को आजमाकर देखें। फिर भी ट्रेडिंग करनी है तो इसमें इफरात पूंजी का केवल 5% हिस्सा लगाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

याद रखें कि आज तक ट्रेडिंग का ऐसा कोई तरीका नहीं निकाला गया है जो 100% कामयाबी की गारंटी दे सके। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग प्रायिकता का खेल है। इसलिए यहां हमेशा घाटे को न्यूनतम रखने के लिए स्टॉप-लॉस व पोजिशन साइजिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं। इधर, हमारे सीखते जाने का सिलसिला जारी है। हाल ही में आरएसआई के 20% से नीचे चले जाने और ओपन इंटरेस्ट का नया तरीका सीखा है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम आपके लिए जो भी स्टॉक चुनते हैं, उसके मूल में रहता है कि किसी स्टॉक में संस्थागत ट्रेडर कहां पर एंट्री और एक्जिट ले सकते हैं। इसके लिए हम मुख्य रूप से कैंडल के आकार, स्थान, मूविंग औसत और आरएसआई जैसे गिने-चुने इंडीकेटरों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही भावों की चाल को चार्ट पर अलग-अलग टाइमफ्रेम में देखते हैं। चार्टिंग का सॉफ्टवेयर हम बीएसई व एनएसई का ही इस्तेमाल करते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले पौने चार साल में बहुतों ने यह सेवा ली, बहुत-से बाद में पीछे हट गए और बहुत-से अब भी मैदान में डटे हैं। जो डटे हैं, वे यकीनन ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्रेडिंग का अपना सिस्टम बनाया होगा। गांठ बांध लें कि अपना सिस्टम बनाए बिना आप सटीक सलाहों से भी बराबर नहीं कमा पाएंगे। हम आपकी रिसर्च का बोझ हल्का करते हैं ताकि आप न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमा सकें। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मासूम ट्रेडरों की ठगी को कैसे रोका जाए? ‘अर्थकाम’ ने ऐसे एक ठग को नजदीकी से पहचाना। हालांकि उस ठग की दुकान अब भी चालू है। उसमें एक राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता तक ने निवेश कर रखा है। खैर, रिसर्च का क्रम शुरू हुआ। बहुत सारी किताबें पढ़ डालीं। कई महंगी-महंगी क्लासें कीं। टेक्निकल एनालिसिस भी सीखी। अहसास हुआ कि बगैर अपना सिस्टम बनाकर ट्रेड करने वाले बाजार में हमेशा पिटते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाजार में ट्रेडिंग का यह कॉलम शुरू हुए करीब चार साल होने जा रहे हैं। इसकी प्रेरणा तब मिली, जब हमने देखा कि हिंदी, मराठी या गुजराती भाषी तमाम लोग टिप्स पर ट्रेडिंग करते हैं। कंपनी को ऑर्डर मिलनेवाले हैं, बड़ा एफआईआई खरीदने जा रहा है, म्यूचुअल फंड की खरीद आनेवाली है या बाज़ार का कोई बड़ा खिलाड़ी हाथ लगानेवाला है। ऐसे सफेद झूठ फैलाकर मासूम ट्रेडरों को ठगा जा रहा था। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

लोगबाग ऑप्शंस के दीवाने हैं, खासकर निफ्टी व बैंक निफ्टी ऑप्शंस के। इक्विटी डेरिवेटिव्स के टॉप-20 कॉन्ट्रैक्ट में आपको यही दो ऑप्शंस छाए मिलेंगे। धन भी ज्यादा नहीं लगता। मसलन, निफ्टी-8950 में कॉल का भाव है 16.75 रुपए और लॉट 75 का तो कुल लगे 1256 + 30 रुपए का ब्रोकरेज। डूबें तो यही 1286 रुपए, और फायदा महीने भर में 50-60%! बस डेल्टा, थीटा, गामा व वेगा सीख लें। फंसान है तगड़ी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जिस चीज़ के चाहनेवाले बढ़ जाते हैं तो उसके भाव चढ़ जाते हैं। यह बात शेयर बाज़ार पर भी लागू होती है। हां, यह छोटे या रिटेल निवेशकों की नहीं, बड़ों की खरीद असरकारी होती है। ट्रेडिंग में सफलता की कुंजी है कि इसे कैसे पकड़ा जाए। कुछ लोग इसके लिए शेयरों के फ्यूचर्स के ओपन इंटरेस्ट को आधार बनाते हैं। वे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस से बाहर के शेयरों को हाथ नहीं लगाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

कंपनियों में पांच-दस नहीं, बल्कि साल-दो साल के लिए भी निवेश करनेवालों की संख्या घटती जा रही है क्योंकि अधिकांश लोगों के लिए यह घाटे का सौदा साबित हुआ है। लगाया था सौ रुपए, दस साल में घटकर रह गया आठ रुपया। इसलिए आम निवेशक ट्रेडर बनते गए। उसमें भी कोई सिरा नहीं मिला तो मूल शेयरों के डेरिवेटिव्स, फ्यूचर्स व ऑप्शंस में खेलने लगे और कम से भयंकर जोखिम में धंस गए। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी