ये वरदान कहीं अभिशाप न बन जाए
देश में हर महीने कम से कम 10 लाख नौजवान रोज़गार की लाइन में लग जाते हैं, यानी साल भर में करीब डेढ़ करोड़। नौजवानों की बढ़ती तादात को अर्थव्यवस्था के लिए वरदान माना जाता रहा है। लेकिन उन्हें काम-धंधे या नौकरियों में नहीं खपाया जा सका तो इस वरदान को अभिशाप बनते देर नहीं लगेगी। यह मोदी सरकार के लिए बेहद गंभीर चुनौती है। इसे जुबानी जमाखर्च से नहीं निपटा जा सकता। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
