संवत 2073 बीत गया। नया संवत 2074 शुरू हो रहा है। सभी शुभलाभ के लिए शुभ शुरुआत की कामना रखते हैं। यह बहुत अच्छी बात है और सहज मानव स्वभाव का हिस्सा है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में जहां हर दिन नहीं, हर पल हालात व भाव बदलते हों, वहां क्या कोई शुभ शुरुआत अपने-आप में पर्याप्त हो सकती है? यहां तो बराबर ‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी’ वाली स्थिति रहती है। इसी फ्रेम में हमें मुहूर्तऔरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता के लिए ज़रूरी आत्म अनुशासन का 7वां व आखिरी कदम है अभ्यास। कोई भी हुनर किताबों से नहीं, बल्कि अभ्यास से सीखा जाता है। द्रोणाचार्य नहीं मिले, लेकिन एकलव्य अभ्यास के दम पर अर्जुन से भी बड़ा धनुर्धर बन गया। हर किसी को अपना खाना खुद पचाना होता है, उसी तरह ज्ञान को व्यवहार में खुद उतारना पड़ता है। शुरुआत में थोड़ी पूंजी, थोड़ा रिस्क। ट्रेडिंग पूंजी को बचाकर चलें। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सॉफ्टवेयर कौन-सा इस्तेमाल करना है? आपका ब्रोकर चार्टिंग का जो सॉफ्टवेयर देता है, क्या वह पर्याप्त है या आपका काम बीएसई व एनएसई की साइट पर मिल रहे मुफ्त चार्ट से चल जाता है? टेक्निकल एनालिसिस के कौन-से इंडीकेटर इस्तेमाल करने हैं? एंट्री, एक्जिट व स्टॉप लॉस का क्या सिस्टम अपनाना है? पक्का कर लें कि आपने सिस्टम में संस्थाओं की मांग व सप्लाई के संकेत ज़रूर शामिल किए गए हों। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेडिंग के मकसद का मुख्य फ्रेम, उसके भीतर लक्ष्य, फिर सफलता का विज़न व बुद्धि के इस्तेमाल पर ज़ोर। आत्म अनुशासन के इन चार कदमों के बाद पांचवां कदम है अपने ट्रेडिंग सिस्टम के लिए सारा हार्डवेयर चौकस बनाने में जुट जाना। कहां बैठेंगे, सुबह या शाम कितना समय लगाना है, लैपटॉप कौन-सा होगा, नेट कनेक्शन किसका लेना है, किस ब्रोकर की सेवा लेनी है? इन सारे मसलों को कायदे से सुलझा लें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

अपनी कमियों और बाज़ार के सच को समझने की दृष्टि हासिल करने के बाद परखें कि यहां कौन सफल होते हैं और कितने लाख कोशिशों के बावजूद पिटते रहते हैं। दोनों से सीखें। लेकिन किसी रोल मॉडल या अकाट्य मंत्र के चक्कर में न पड़ें। हां, बाज़ार के दिग्गजों को ज़रूर पढ़ना चाहिए। मोटे तौर पर समझ लें कि भावनाओं व आवेग को किनारे रख बुद्धि का जितना इस्तेमाल करेंगे, उतना सफल होंगे। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

मकसद और लक्ष्य के बाद तीसरा कदम यह है कि आप सफलता का गहरा विज़न विकसित करें। बाज़ार में सफल होने के लिए कौन-कौन सी बातें ज़रूरी हैं। पूंजी के अलावा इसमें सबसे बड़े संसाधन खुद आप हैं। इसलिए बारीकी से समीक्षा करें कि आपकी कौन-सी कमज़ोरी सफलता हासिल करने में बाधा बन सकती है। उस पर ध्यान केंद्रित करें। अधिकतम कोशिश यह रहे कि हम बाजार के सच को साफ-साफ देख सकें। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद स्पष्ट करने के बाद उसके मद्देनज़र तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है। यह लक्ष्य हवा-हवाई नहीं,  बल्कि आपकी अपनी सामर्थ्य व संसाधनों के भीतर होना चाहिए। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक तरह का बिजनेस है और हर बिजनेस के लिए मेहनत के अलावा दूसरी सबसे ज्यादा ज़रूरी चीज़ होती है पूंजी। शेयरों की ट्रेडिंग में इस बाज़ार के लिए रखे कुल धन का 5% से ज्यादा नहीं लगाना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाजार में ट्रेडिंग की त्रिपक्षीय चुनौती का मुकाबला करना कठिन है। पर मुश्किल नहीं। इसे आत्म अनुशासन के सात कदमों से हम नाप सकते हैं। पहला कदम। आप साफ समझ लें कि ट्रेडिंग करने के पीछे आपका सामाजिक या पारिवारिक मकसद क्या है। अगर केवल अपने लिए ट्रेडिंग करना चाहते हैं, तब मामला संगीन है क्योंकि ऐसी सूरत में आप कभी भी ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करने के लती बन सकते हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

गिरते हैं शह-सवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले। जीवन में वही सफल होते हैं जो चुनौतियां लेते हैं। जिन बूड़ा तिन पाइयां गहरे पानी पैठि। मैं बपुरा बूड़न डरा, रहा किनारे बैठि। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एक साथ हमें तीन मोर्चों पर चुनौती देती है। आर्थिक के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक स्तर पर। इसलिए इसे अपनाते वक्त बेहद सावधानी, लगन व मेहनत ज़रूरी है। अब परखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

ट्रेडिंग में सफलता पानी है तो अपने फैसलों की नियमित समीक्षा करनी पड़ेगी। खासकर उन सौदों की जिनमें तगड़ी चोट लगी है। स्टॉप लॉस को चोट मानना मूलतः गलत सोच है। वह तो वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग करने के बिजनेस की लागत है जिससे बचना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं। बाकी सौदों में देखना पड़ेगा कि आपने अनुशासन व ट्रेडिंग सिस्टम को कहां तोड़ा है। सिस्टम बनाए बिना ट्रेड करना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी