ज्यादातर रिटेल ट्रेडर क्यों हैं घाटे में!
दिक्कत यह है कि अपने यहां आर्थिक आंकडों का घनघोर अकाल है। मुद्रास्फीति या औद्योगिक उत्पादन को छोड़ दें तो हम बहुत सारे आंकड़ों मे बहुत-बहुत पीछे चलते हैं। इसलिए बहुत सारे काम में अंदाज़ चलता है। ऐसा ही एक अंदाज़ है कि शेयर बाज़ार के लगभग 95% ट्रेडर घाटा उठाते हैं, जबकि बमुश्किल 5% ही कमा पाते हैं और इन 95% ट्रेडरों में से तकरीबन सारे के सारे रिटेल ट्रेडर होते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
