ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती। इसी तरह ट्रेडिंग में हर तरफ मुंह मारने से कमाई नहीं होती। किसी के बताए स्टॉक की तरफ लपक लेने की आदत सही नहीं है। हमें अपनी लय-ताल से मिलनेवाले 15-20 स्टॉक्स चुन लेने चाहिए। बहुत हुआ तो दायरा 40-50 तक जा सकता है। लेकिन उसके बाहर नहीं। ट्रेडिंग में कमाई का आधार है शेयरों के भाव की छोटी-बड़ी लहरों पर नीचे से ऊपर तक कमाना। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जिस तरह हर इंसान का स्वभाव अलग होता है, उसी तरह हर स्टॉक का भी स्वभाव अलग-अलग होता है। हालांकि कुछ स्टॉक्स एकदम एक-सा बर्ताव करते हैं। पर अमूमन हरेक की बारीकियां अलग होती हैं। दरअसल, किसी स्टॉक में किस तरह के निवेशक व ट्रेडर सक्रिय हैं, उसी से उसका स्वभाव बनता है। ऐसे में सबसे अच्छी स्थिति तब होती है जब स्टॉक का स्वभाव हमारे अपने स्वभाव की लय से मिल जाए। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

अखबार के सोलह पन्नों में हर पन्ना सबके लिए नहीं होता। न्यूज़ चैनल का हर प्रोग्राम भी सबके लिए नहीं होता। इसी तरह हर दिन इस कॉलम में ट्रेडिंग के माकूल मौके पेश जाते हैं। हमारी कोशिश न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिवॉर्ड के सौदे पकड़ने की होती है। फिर भी ज़रूरी नहीं है कि कोई सब्सक्राइबर रोज़ाना ट्रेडिंग करे। कहावत भी है कि सौ सुनार की, एक लोहार की। हिसाब-किताब लगाकर सौदा करें। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

यहां सुझाए चार स्टॉक्स में से चुनाव कैसे करें? इसके लिए चार टेक्निकल संकेतकों को लेकर आपको अपना ट्रेडिंग सिस्टम बनाना होगा। ये चार संकेतक हैं: चार्ट पर भाव जहां से ठीक पिछली बार उठे या गिरे थे; नीचे की आखिरी कैंडल हैमर है या ऊपर की कैंडल शूटिंग स्टार; 5, 13, 20 दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज और 50, 75, 100, 200 300 व 365 दिनों के सिम्पल मूविंग एवरेज; और आरएसआई। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

क्या हम रोज़ाना जो तीन शेयर अभ्यास के लिए चुनकर कहते हैं कि इसमें स्टॉप-लॉस वगैरह खुद निकाल लें, वो एकदम फालतू जानकारी है और आपको अंतिम पैरा में एंट्री, एक्जिट व स्टॉप-लॉस की पूरी गणना के साथ चुने गए स्टॉक को ही देखना है? नहीं। दरअसल, हम ट्रेडिंग की टिप्स नहीं देते, बल्कि स्टॉक चुनने में आपकी मदद करते हैं। आप तीन + एक में से किसी को ठोंक-बजाकर चुन सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

इस कॉलम के दो-तिहाई हिस्से में बताया जाता है कि ठीक पिछले दिन निफ्टी का क्या हाल रहा, शेयर बाज़ार में घबराहट का सूचकांक क्या कहता है, संस्थाओं की खरीद, अमेरिका व यूरोप में बाजार का बंद स्तर और आज एशिया व ऑस्ट्रेलिया में शुरुआती रुख। फिर निफ्टी की संभावित दिशा के साथ तीन शेयर अभ्यास के लिए। हर दिन इतना बताने का मसकद है आपको खुद निर्णय लेने के लिए प्रेरित करना। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग प्रायिकता का खेल है। जिसको भी यहां से कमाना है, उसे यह बात भलीभांति अपने जेहन में बैठा लेनी चाहिए। दूसरे, यहां काफी अहम रोल इंसान का मन निभाता है। जो धन नहीं लगा रहा और जो लगा रहा है, दोनों का मनोवैज्ञानिक रिस्पांस अलग-अलग होता है। इसलिए कोई भी सलाह तब तक आपके किसी काम की नहीं होती, जब तक आप उसे अपनी कसौटी पर नहीं कस लेते। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल सिस्टम से 42,000 करोड़ डॉलर खींचने जा रहा है, जबकि अगले साल 60,000 करोड़ डॉलर निकालने की योजना है। सिस्टम से धन निकालने से वहां ब्याज़ दरें बढ़ने लगी हैं। दस साल के अमेरिकी ट्रेजरी बांडों पर यील्ड की दर 2.95% हो चुकी है। जाहिर है कि जब विदेशी निवेशकों को सस्ता धन मिलना मुश्किल और अमेरिका में ही ज्यादा रिटर्न मिलने लगेगा, तो वे भारत क्यों आएंगे! अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से 5 फरवरी से कल, 21 फरवरी तक 14,069.78 करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह उनकी मजबूरी है। दरअसल, 2008 के वित्तीय संकट के बाद अमेरिका समेत दुनिया के तमाम केंद्रीय बैंकों ने बांडों के जरिए सिस्टम में भारी भरकम रकम डाली। 2009 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैलेंसशीट 50,000 करोड़ डॉलर थी जो अब 4.2 लाख करोड़ डॉलर की हो गई है। वो इसे घटा रहा है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

कोई भी संस्था या अमीर शेयर बाज़ार में हमेशा के लिए निवेश नहीं करते। उनका मकसद है लाभ कमाना। इस बार बजट के बाद यही सिलसिला जारी है। वे रुक-रुककर मुनाफावसूली कर रहे हैं। पहले सेंसेक्स और निफ्टी ही गिर रहे थे। लेकिन अब मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली शुरू हो गई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के साथ ही अब देशी संस्थाएं भी खरीदने से ज्यादा बेचने लगी हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी