झूठ और प्रपंच से विचार बने जहरीले
अगर आप मानते हैं कि विचार हमेशा सचेत व तार्किक होते हैं तो गलत हैं। विचार अधिकांशतः दिमाग में चल रही कल्पनाओं, मान्यताओं, पूर्वाग्रहों, मूल्यों व नजरिए के घात-प्रतिघात का नतीजा होते हैं। ये तमाम विचार हमारे लिए फायदेमंद या आत्मघाती हो सकते हैं। दुर्भाग्य से ज्यादातर विचार आत्मघाती होते हैं क्योंकि हम उस दौर में रह रहे हैं जब राजनीति से लेकर अर्थनीति व समाज में झूठ व प्रपंच का बोलबाला है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
