अगर आप मानते हैं कि विचार हमेशा सचेत व तार्किक होते हैं तो गलत हैं। विचार अधिकांशतः दिमाग में चल रही कल्पनाओं, मान्यताओं, पूर्वाग्रहों, मूल्यों व नजरिए के घात-प्रतिघात का नतीजा होते हैं। ये तमाम विचार हमारे लिए फायदेमंद या आत्मघाती हो सकते हैं। दुर्भाग्य से ज्यादातर विचार आत्मघाती होते हैं क्योंकि हम उस दौर में रह रहे हैं जब राजनीति से लेकर अर्थनीति व समाज में झूठ व प्रपंच का बोलबाला है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हमारा अवचेतन मन ही मूलतः हमारे विचारों, भावनाओं व बर्ताव का फैसला करता है। यकीनन इसमें चेतन मन का भी योगदान होता है। लेकिन चेतन मन का मुख्य काम किसी रथ के सारथी या कार के ड्राइवर जैसा है। वो अवचेतन मन को जितना बेहतर ट्रेनिंग देगा, उसे जितना रवां रखेगा, उसके विचार, भावना व बर्ताव उतने ही ज्यादा सच या यथार्थ पर आधारित होंगे और वह उतने ही अच्छे नतीजे हासिल करेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

हमारे मन, मस्तिष्क व शरीर में हर क्षण लाखों सूचनाएं प्रोसेस होती हैं। शरीर की दस लाख कोशिकाओं में से हर कोशिका में प्रति सेकेंड कम से कम एक लाख प्रतिक्रियाएं होती हैं। इन सबके घात-प्रतिघात से हमारे विचारों से लेकर भावनाओं और बर्ताव का फैसला होता है। हमें केवल अपने चेतन मस्तिष्क का भान रहता है। बाकी सब कुछ हमारे लिए अनजाना है। सफलता के लिए इन अनजाने को जानना पड़ता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

जो लोग अल्गोरिदम ट्रेडिंग करते हैं, उनकी बात अलग है क्योंकि उनके लिए सारा काम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कर देता है। लेकिन आम ट्रेडर खरीदने व बेचने के जो भी सौदे करता है, उसका सारा फैसला पहले उसके दिमाग में होता है। इसलिए उसे हमेशा यह हकीकत याद रखनी चाहिए कि उसके दिल-दिमाग, मन व शरीर का 95% से 97% काम उसके चेतन से बाहर है जिसे उसका अवचेतन या अचेतन दिमाग चलाता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

वही-वही काम करते रहें और सोचें कि उसका पहले से अलग परिणाम आ जाएगा तो ऐसा नहीं हो सकता। कर्म बदलने से ही परिणाम बदलता है। लेकिन पहले ज़रूरी है कि पता चले कि आपके कर्म में कहां गलती है और साथ ही आप उसे दिल से स्वीकार करें। गलती पता भी चल गई और आपने उसे स्वीकार नहीं किया तो कोई नतीजा नहीं निकलेगा क्योंकि ट्रेडिंग तो आखिरकार आपको ही करनी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आप गलत राह पर हो, इसका गहरा अहसास जितनी जल्दी हो जाए, उतनी ही जल्दी आप वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग जैसे तमाम कार्यक्षेत्रों में अपने नकारात्मक तौर-तरीकों को सुधार सकते हो। वहीं, अगर आप अपने बजाय हालात में दोष निकालते हैं तो एक तरह से हाथ खड़े कर देते हैं और कहीं न कहीं मान बैठते हैं कि आपके तईं कुछ नहीं हो सकता। तब आप वही-वही गलती दोहराते रहने को अभिशप्त हैं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

आप वो चीज़ बदल नहीं सकते, जिसका आप मुकाबला नहीं कर सकते और जिस चीज़ को आप जानते नहीं, उसका मुकाबला नहीं कर सकते। जीवन स्थितियों को बदलने के दौरान हमें हर दिन कुछ ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह सीधा व सरल नियम वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर भी लागू होता है। बस, यहां बदलने का मतलब बाज़ार को जान और उससे जूझकर अपने माफिक मुनाफा कमाना होता है। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

नए-नए ट्रेडर के मन में बैठा रहता है कि उसे कम से कम 80% सौदे जीतने ही जीतने हैं, 20% हार भी जाए तो चलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि शेयर बाज़ार की अनिश्चितता के बीच धुरंधर ट्रेडरों तक का औसत स्ट्राइक-रेट 60% से ज्यादा नहीं होता। कभी-कभी वे 40% सौदे ही जीतते और 60% सौदे गंवा देते हैं। फिर भी रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात को माकूल रखने के कारण वे नियमित कमाते रहते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

कुछ जानकार तो यहां तक कहते हैं कि शुरुआती ट्रेडरों को उन्हीं सौदों को हाथ लगाना चाहिए जिनमें रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात कम से कम 1:5 का हो। कहने का मतलब यह कि हमें अपनी व्यावहारिक सीमाओं को ध्यान में रखकर ही ट्रेडिंग करनी चाहिए। ट्रेडर को बराबर इसका भी हिसाब लगाते रहना चाहिए कि ब्रोकर के कमीशन और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स वगैरह देने के बाद उसकी सचमुच की कमाई कितनी हो रही है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

छोटे घाटे और बड़े मुनाफे की रणनीति में हम वही सौदे चुनते हैं जिनमें रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात कम से कम 1:3 का होता है। यानी, 2% रिस्क तो 6% बढ़ने की गुंजाइश। रिवॉर्ड की झलक शेयर के भावों का चार्ट दिखा देता है। वह रिस्क भी दिखाता है। लेकिन रिस्क बड़ी व्यक्तिगत चीज़ है। हर किसी की रिस्क उठाने की क्षमता अलग-अलग होती है। शुरुआती ट्रेडर को अधिकतम 2% रिस्क लेकर ही चलना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी