वित्तीय बाज़ार ऐसी जगह है जहां धोखा व फरेब जमकर चलता है। होता है कुछ और दिखाया जाता है कुछ और। बाज़ार काफी बढ़ चुका होता है, तब म्यूचुअल फंड खरीद करते हैं। लोगबाग खरीदने दौड़ पड़ते हैं। तभी अखबार, पत्रिकाएं और टीवी चैनल तेज़ी का हल्ला मचाते हैं। ऐसे माहौल में समझदार निवेशक हाथ बांधे रहते हैं, जबकि आम ट्रेडर भेड़चाल के शिकार हो जाते हैं और अपना सत्यानाश कर बैठते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बराबर बढ़ते शेयर पर मन में संदेह कि आखिर वो कितना और बढ़ेगा। वहीं. बराबर गिरते शेयर को लेकर भरोसा कि आखिरकार वो कहां तक गिरेगा। रिटेल ट्रेडर इसी संदेह व भरोसे के बीच झूलते हैं और घाटा खाते हैं। वहीं, प्रोफेशनल ट्रेडर बराबर गिरते शेयरों को हाथ नहीं लगाते, जबकि अपट्रेन्ड वाले शेयरों को रिट्रेसमेंट या गिरने पर खरीद लेते हैं। दरअसल, गिरते शेयरों को ज़रा-सा बढ़ते ही बिकवाली दबा डालती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

हालांकि रिटेल ट्रेडर को लॉन्ग या खरीदने के ही सौदे करने चाहिए क्योंकि शॉर्ट सौदों का रिस्क उनकी क्षमता से बाहर है। फिर भी उसे समझना तो चाहिए कि शेयरों के भाव गिरते क्यों हैं? किसी शेयर को बेचने की व्याकुलता ज्यादा हो और लोगबाग फटाफट उससे निकल लेना चाहते हों, तब वो गिरता चला जाता है। कंपनी के खराब नतीजे, प्रतिकूल खबर या उद्योग संबंधी नुकसानदेह नीति इसकी वजह हो सकती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना है तो रिटेल ट्रेडर को समझना होगा कि शेयरों के भाव फटाफट बढ़ते क्यों हैं? सीधा-सा जवाब है कि किसी शेयर को खरीदने की आतुरता बढ़ जाए, संतुलन खरीद की तरफ झुक जाए तो वह बढ़ने लगता है। इसकी अनेक वजहें हो सकती हैं। कंपनी संबंधी माकूल खबर, बड़े खरीदार की एंट्री और भविष्य के बारे में किसी ब्रोकरेज़ हाउस या नामचीन निवेश सलाहकार संस्था की सकारात्मक रिपोर्ट। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हम कभी-कभी फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस को मिला देते हैं। सोचते हैं कि कंपनी का फंडामेंटल सॉलिड है, तो उसका शेयर पक्का बढ़ेगा। लेकिन इस बढ़त में महीनों नहीं, सालों लग सकते हैं, जबकि ट्रेडिंग का सौदा कुछ दिनों या एकाध महीने का होता है। बाज़ार बंद होने के दिन शनिवार को आए शानदार नतीजों के बावजूद सोमवार को कंपनी का शेयर गिर जाता है क्योंकि उसमें मांग सप्लाई से कम होती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

ट्रेडिंग से पहले ज़रूरी है कि मन को एकदम साफ व निर्मल कर लिया जाए ताकि बाहर जो चल रहा है, उसकी सही तस्वीर उसमें बन सके। मन को साफ करने का काम आप गौतम बुद्ध द्वारा खोजकर निकाली गई विपश्यना साधना के नियमित अभ्यास से कर सकते हैं। शेयर बाज़ार में जो चल रहा है, वो भावों के चार्ट में दिखता है जिसे डिकोड करने की आंशिक कला टेक्निकल एनालिसिस सिखाती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

अगर आपको लगता है कि वॉरेन बफेट, जॉर्ज सोरोस या राकेश झुनझुनवाला के तरीके आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सफलता दिला देंगे तो यह आपका कोरा भ्रम है। यहां पर हर किसी को अपने रिस्क प्रोफाइल, पूंजी, मानसिक बुनावट व स्वभाव को ध्यान में रखते हुए खुद का ट्रेडिंग स्टाइल गढ़ना होता है। हमारे शेयर बाज़ार की क्या खासियत है, यहां किस तरह के लोग सक्रिय हैं, यह सब समझना पड़ता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

किसी बाहरी मंत्र या टिप्स से आपको ट्रेडिंग में सफलता नहीं मिल सकती। बाहरी कम्पन तो आपको कहीं और भटका ले जाएंगे। आपको कल्पना लोक में गुम कर देंगे, जबकि आपकी मुक्ति आपके अपने कम्पनों में छिपी पड़ी है। हर बाहरी प्रभाव से परे आप जितना ज्यादा अपनी काया, चित्त, उसकी वृत्तियों और संवेदनाओं में हर पल उभरते कम्पनों को पकड़ते हैं, उतनी ही ज्यादा आपकी दृष्टि साफ होती चली जाती है। अब सोम का व्योम…और भीऔर भी

ट्रेडिंग में आपकी पूंजी लगी होती है, सारा जोखिम आप उठाते हो। इसलिए अंतिम फैसला भी शांत मन से पूरी व्यावहारिक व यथार्थपरक गणना के बाद आपका ही होना चाहिए। शांत मन और यथार्थपरक गणना की क्षमता हासिल करने में विपश्यना काफी मददगार हो सकती है। वह असल में बाहर से कुछ नहीं करती, बल्कि आपकी ही नैसर्गिक क्षमता को उभारती है और वहीं से निकलते हैं हर क्षेत्र में सफलता के सूत्र। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

विपश्यना साधना और उसका नियमित अभ्यास आपको न केवल अवचेतन में जड़ जमा चुकी निरर्थक धारणाओं से मुक्त करता है, बल्कि वह तमाम बाहरी प्रभावों के झांसे से भी निकालता है। लेकिन यह धीरे-धीरे होता है, अचानक किसी चमत्कार की तरह नहीं। रोजमर्रा के जीवन के साथ ही वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में भी इसका लाभ मिलता है। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और जो जैसा है, आप उसे वैसा देखने लगते हो। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी