हमारे शेयर बाज़ार की हालत इन दिनों डांवाडोल चल रही है। सुबह का जोश शाम तक ठंडा पड़ जाता है। दरअसल अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति ने इधर बाज़ार को ज़मीन पर उतारना शुरू कर दिया है। लगता है कि जैसे उस पर नकारात्मक तत्वों की साढ़े साती सवार हो गई हो। इस साढ़े साती के काल्पनिक नहींं, सचमुच के कारक हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्हें सुलझाना भी कतई आसान नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

ज्ञान को सफलता तक कौशल पहुंचाता है और कौशल के लिए अभ्यास ज़रूरी है। अभ्यास भी जहां-तहां हाथ मारने का नहीं, बल्कि अनुशासन व नियम में बंधकर चलने का। जिस तरह जीवन सांसों की डोर से बंधा है, उसी तरह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भावों की लय-ताल से बंधी है। भावों की यह डोर पकड़कर हम अभ्यास करते हैं। धीरे-धीरे भावों का पैटर्न और रुख बदलने का ढर्रा समझ में आने लगता है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

लंबे निवेश के लिए फंडामेंटल एनालिसिस का सहारा लेना चाहिए, टिप्स का कभी नहीं। ट्रेडिंग के लिए टेक्निकल एनालिसिस की मूल बातों को जान लेना चाहिए। लेकिन बाज़ार में देशी व विदेशी संस्थाओं और नवसिखिया रिटेल ट्रेडरों का संतुलन समझना ज़रूरी है ताकि हम पतंगों की तरह दीए की लौ पर जल जाने के अंजाम से बच सकें। संस्थाओं की राह ही सही राह है। ट्रेडिंग में सफलता की बुनियादी समझ यही है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में खिलाड़ियों के खेल और संतुलन को जानने के साथ ही यह बात मन में कहीं गहरे बैठा लेना चाहिए कि  ट्रेडिंग और निवेश मूलतः प्रायिकता के खेल हैं। यहां कुछ भी पक्का नहीं। अनुमान व संभावना चलती है। आंख मूंद छलांग लगाने से सबसे अच्छा पाने की उम्मीद आत्मघाती है। शेयर बाज़ार में अच्छी तरह गिना व समझा गया रिस्क लिया जाता है, जिसमें रिटर्न की प्रायिकता कभी शत-प्रतिशत नहीं होती। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश से जुड़े ज्ञान को कई हिस्सों में बांटा जा सकता है। सबसे पहले तो यह जानना ज़रूरी होता है कि वित्तीय बाज़ार काम कैसे करता है। यहां कौन-कौन से मुख्य खिलाड़ी सक्रिय हैं और रिटेल ट्रेडरों व निवेशकों से लेकर म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बैंकों, प्रोफेशनल ट्रेडरों, ब्रोकिंग हाउसों व विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की क्या भूमिका व वजन होता है। उनके ऑर्डर फ्लो को समझना होता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ज्ञान पढ़कर पाया जा सकता है। लेकिन कौशल तो केवल अभ्यास से हासिल किया जा सकता है। यह अभ्यास किसी गुरु की देखरेख में हो तो सबसे अच्छा है। लेकिन ज़माने के सारे गुरु जब स्वार्थों से बंधे हों, तब कौशल में पारंगत होने के लिए एकलव्य ही बनना पड़ता है। नियम और अनुशासन गुरु का काम करते हैं, जबकि उनका पालन करते हुए निरंतर अभ्यास से हम हुनरमंद बनते चले जाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

दुनिया-जहान के किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए दो चीज़ें ज़रूरी होती हैं। पहली है ज्ञान और दूसरी है कौशल या हुनर। यह बात वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। इनमें से किसी एक चीज़ का होना और दूसरी का न होना ऐसा अधूरापन है जो मंज़िल तक नहीं पहुंचा सकता। विषय की जानकारी और उससे संबंधित ज्ञान बुनियाद है। लेकिन सफलता की इमारत केवल बुनियाद से नहीं बनती। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बिजनेस चैनल और ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यम बहुत सारी जानकारियां व आंकड़े फेंकते रहते हैं। मान भी लें कि इस डेटा से ज्ञान बढ़ता है, तब भी सच्चाई यही है कि वित्तीय बाज़ार में सफलता पाने के लिए जो चीज़ें चाहिए, ज्ञान उसका महज एक हिस्सा है। क्लच, गियर, ब्रेक व स्टीयरिंग का ज्ञान पढ़कर आप ड्राइवर नहीं बन जाते और न ही सर्जरी की किताबें पढ़कर आप कुशल सर्जन बन सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

ट्रेडिंग और निवेश पर सारी अच्छी किताबें अंग्रेज़ी में हैं और बहुत दुरूह हैं। वैसे भी भारतीय बाज़ार की हकीकत उनमें लिखी बातों से अलग है। हां, ऑनलाइन मीडिया पर हिंदी में भी खूब जानकारी व सूचनाएं मिलती हैं और एकदम मुफ्त में। ऊपर से बिजनेस के कुछ हिंदी चैनल भी हैं। लेकिन मुफ्त में मिल रही तमाम जानकारियां अक्सर गलत व बेहद खतरनाक होती हैं। उनका मज़ा अंततः सज़ा बन जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बहुत-से लोग किताबें व ऑनलाइन लेख पढ़कर या वीडियो देखकर वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग व निवेश की दुनिया में उतरते हैं। उन्हें लगता है कि इससे वे ट्रेडिंग व निवेश की सारी विद्या सीखकर चंद सालों में सचमुच बहुत धनवान हो जाएंगे। सचमुच ऐसा होता तो आज दुनिया में वॉरेन बफेट और जॉर्ज सोरोस की भरमार होती। ऑनलाइन माध्यमों व किताबों से ज्ञान ज़रूर मिलता है। पर सफलता के लिए ज्ञान पर्याप्त नहीं। अब सोम का व्योम…औरऔर भी