कहते हैं बिना डूबे मोती और बगैर तकलीफ उठाए सुख नहीं मिलता। अंग्रेज़ी में यही बात ‘नो पेन, नो गेन’ के रूप में कही जाती है। लेकिन इस कहावत के बल पर रिस्क लेने को ललकारनेवाले यह नहीं बताते कि ‘पेन’ हमेशा ‘गेन’ से कम होना चाहिए। अन्यथा, पीड़ा व तकलीफ हमें इसकदर तोड़ डालती है कि उठना दूभर हो जाता है। वित्तीय बाज़ार के ट्रेडर को यह सीमा हमेशा याद रखनी चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

इस समय बाज़ार पर नकदी के संकट का डर छाया हुआ है। इससे गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) और बैंकों के ही नहीं, इन्फोसिस जैसी आईटी कंपनी तक के शेयरों में बिकवाली चल पड़ी है। चूंकि नकदी के संकट में संस्थाओं को फौरन कैश चाहिए तो उनके लिए खूब चलते मजबूत स्टॉक्स से मुनाफा निकालना सबसे आसान होता है। इस तरह बाज़ार की भगदड़ मुनाफा कमा रही कंपनियों को भी बहा ले जाती है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार अचंभों से भरा हुआ है। जो आप कभी सोच नहीं सकते हो, वही अचानक हो जाता है। तब सारे के सारे नियम, सारी की सारी गणनाएं धरी रह जाती हैं। फंडामेंटल या टेक्निकल, कोई एनालिसिस नहीं काम आती। कभी नोटबंदी जैसा बड़ा कदम शेयर बाज़ार का कुछ बिगाड़ नहीं पाता तो कभी आईएल एंड एफएस का छोटा-सा डिफॉल्ट भी बड़ी गिरावट शुरू कर देता है। ट्रेडरों को यह समझ लेना चाहिए। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आज के दौर में समझदारी इसी में है कि जब तक शेयर बाज़ार की हालत सामान्य नहीं होती, और इसमें छह से आठ महीने भी लग सकते हैं, तब तक रिटेल ट्रेडर ट्रेडिंग छोड़कर दीर्घकालिक निवेशक बन जाएं और एक-दो साल तक का निवेश करें। निवेश करने लायक मजबूत कंपनियां इस समय कम नहीं हैं। इनमें स्टॉप-लॉस की ज़रूरत नहीं। एक स्तर के बाद जितना गिरे, खरीदकर औसत लागत कम कर लेनी चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बहुतेरे लोगों को हाइटाइड में सर्फिंग करने में आनंद आता है। शेयर बाज़ार में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव होने पर कुछ ट्रेडर इंट्रा-डे से लेकर दो-चार दिन में हज़ारों पीट डालते हैं। हाल-फिलहाल तो हज़ारों ट्रेडर निफ्टी ऑप्शंस में ट्रेडिंग के अभ्यस्त हो चुके हैं और एक दिन में 20-25% से ज्यादा कमा लेते हैं। लेकिन ध्यान रहे, ये लोग या तो बहुत ज्यादा पूंजीवाले होते हैं या अभ्यास से उस्ताद बन चुके हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग खुद में सबसे ज्यादा रिस्की है। लेकिन रिस्क को साधने के लिए लचीलापन बरतना ज़रूरी है। हर परिस्थिति में एक जैसा दांव काम नहीं आता। मसलन, इस समय बाज़ार में चंचलता बहुत बढ़ी हुई है। मारकाट मची है। ऐसे में ट्रेडिंग बहुत खतरनाक है। लेकिन इस तूफान में बहुत सारी अच्छी कंपनियों के शेयर ज़मीन पर आ गिरे हैं तो उनमें लंबा निवेश लाभकारी हो सकता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अभी रिस्क व अनिश्चितता यकीनन बहुत है। पर इससे दूर क्यों भागना! आखिर रिस्क लेंगे तभी तो रिटर्न कमा पाएंगे। बाज़ार का पुख्ता और सीधा-सा नियम है कि आप जितना ज्यादा रिस्क लेंगे, उतना ही ज्यादा रिटर्न हासिल करेंगे। हमारा कहना है कि रिस्क लेने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन यह रिस्क सुविचारित और अपनी सामर्थ्य के अनुरूप होना चाहिए। शेर से लड़ने जैसे रिस्क से क्या फायदा, जिसमें जान जानी तय है! अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

बाज़ार में जितनी अनिश्चितता, उतना ही ज्यादा जोखिम। इस समय भीतरी और बाहरी कारकों की वजह से हमारे शेयर बाज़ार में जैसी अनिश्चितता छाई हुई है, उसमें महज पांच-दस लाख रुपए की पूंजी लेकर बाज़ार में उतरे रिटेल ट्रेडरों के लिए दूर से तमाशा देखना ही उचित है क्योंकि ज़रा-सा दांव उल्टा पड़ते ही उनकी सारी की सारी ट्रेडिंग पूंजी उड़ सकती है। और, पूंजी ही न रही तो ट्रेडिंग क्या खाक करेंगे! अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आर्थिक कारकों का खराब होना समूचे बाज़ार के लिए एक जैसा नहीं होता। हर कंपनी पर उनका समान असर नहीं पड़ता। जैसे, डॉलर के मुकाबले रुपए का कमज़ोर होना आयातक कंपनियों पर भारी पड़ा है, जबकि इससे निर्यातक कंपनियों की आय बढ़ गई है। इधर रुपए की कमज़ोरी के दौर में आईटी कंपनियों के शेयरों का बढ़ जाना यही दिखाता है। इसलिए शेयर बाज़ार में ‘सब धान बाइस पसेरी तौलना’ सही नहीं है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम कहीं न कहीं मानकर बैठे हैं कि शेयर बाज़ार बराबर सीधी रेखा में चलता है। इसलिए कहां तक जाएगा, इसका अनुमान ट्रेन्ड-लाइन खींचकर लगाया जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि शेयर बाज़ार सीधी रेखा में नहीं, बल्कि हमेशा लहरों में चलता है। बढ़ता या गिरता है तो लहरों की शक्ल में। अगर बाज़ार की यह लहरें बंद हो जाएं तो वहां ट्रेडिंग करने के सारे मौके एकबारगी खत्म हो जाएंगे। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी