व्यक्तियों से आगे बढ़ें तो शेयर बाज़ार असल में संस्थाओं का खेल है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई या एफआईआई) और देशी निवेशक संस्थाओं (डीआईआई) की बाज़ार में अहम भूमिका है। इसके कैश से लेकर डेरिवेटिव सेगमेंट तक में वे हर दिन हज़ारों करोड़ रुपए लगाते हैं। एक बेचता तो दूसरा खरीदता है। यह अलग बात है कि इस साल के शुरू से एफआईआई अमूमन बेच रहे हैं जबकि डीआईआई खरीद रहे हैं। अब देखें गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

सच कहें तो शेयर बाज़ार इफरात धनवाले अमीरों का क्लब है जिन्हें एचएनआई या हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स कहा जाता है। अकेले बीएसई में ये लोग हर दिन करीब 1000 करोड़ का धंधा करते हैं। खुद ब्रोकरेज हाउसों का धंधा प्रतिदिन 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। एनएसई में यह आंकड़ा इसका पांच से दस गुना होगा। इन सबके बीच रिटेल निवेशकों व ट्रेडरों की स्थिति सच्चाई से अनजान भूल-भटके मुसाफिर जैसी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

देश में प्रति परिवार औसत आय 16,480 रुपए/माह है। हम प्रति व्यक्ति आय में दुनिया के 188 देशों में 140वें नंबर पर है। लेकिन अपने यहां अमेरिका व चीन के बाद सबसे ज्यादा 119 डॉलर अरबपति हैं। यहां इस समय 3.43 लाख लोग ऐसे हैं जिनके पास 7.28 करोड़ रुपए से ज्यादा दौलत है। इन लाखों भारतीयों के पास ज़रूरत से बहुत-बहुत ज्यादा धन है जिसका एक हिस्सा शेयर बाज़ार में आता होगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में डिलीवरी आधारित कैश सेगमेंट में हर दिन 30,000 करोड़ रुपए का कारोबार, जबकि डेरिवेटिव सेगमेंट में हर दिन 4.15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार। आखिर जिस देश में 22% लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं और 80% लोग किसी तरह गुजारे लायक कमा पाते हैं, वहां आखिर कौन-से लोग हैं जो प्रतिदिन 4.50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा शेयर बाज़ार में दांव पर लगा देते हैं? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

संवत 2075 की पूरे दिन की पहली ट्रेडिंग। बीता संवत 2074 शेयर बाज़ार में बड़ी कंपनियों के लिए ठीक रहा, जबकि छोटी व मध्यम कंपनियों को मूल्य गंवाना पड़ा। इस दौरान सेंसेक्स कुल जमा 8% और निफ्टी 4% बढ़ा, लेकिन मिडकैप सूचकांक 8% और स्मॉलकैप सूचकांक 16% गिर गया, जबकि उससे पिछले साल ये दोनों करीब 50% बढ़े थे। जाहिर है कि बाज़ार में छाई आशा अब निराशा की तरफ बढ़ रही है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम हिंदुस्तानी कुछ ज्यादा ही उत्सवधर्मी हैं। खुशियां मनाने के खूब त्योहार बना रखे हैं। यहां तक खरीदने के भी अलग त्योहार हैं। धनतेरस, गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया और न जाने क्या-क्या। दिवाली के त्योहार पर तो लक्ष्मी पूजन के बाद स्टॉक व कमोडिटी एक्सचेंज बाकायदा मुहूर्त ट्रेडिंग करते रहे हैं। आज बीएसई व एनएसई में मुहूर्त ट्रेडिंग शाम 5.30 से 6.30 बजे तक होगी। प्री-ओपन सत्र 15 मिनट पहले शुरू हो जाएगा। आज हुए सारे सौदेऔरऔर भी

इस समय महालक्ष्मी खुलकर चंचला नहीं हो पा रही हैं। अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह रुकने लगा है। परेशान होकर सरकार तक को रिजर्व बैंक से कहना पड़ा कि एनबीएफसी को नकदी संकट में न फंसने दे। यह संकट आईएल एंड एफएस के डिफॉल्ट से उभरा और अभी तक मिटा नहीं है। सरकार और रिजर्व बैंक संयुक्त प्रयासों से इसे हल नहीं कर सके तो सारा वित्तीय बाज़ार बैठ सकता है। अब दीपावली से पहले की दृष्टि…औरऔर भी

मिर्ज़ा गालिब कितना भी कहते फिरें कि रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल, जो आंख ही से न टपका तो लहू क्या है। लेकिन लहू बहना छोड़कर टपकने या जमने लगे तो इंसान लहूलुहान होकर इस दुनिया तक को अलविदा कह सकता है। इसी तरह लक्ष्मी पर भले ही चंचला कहकर कितनी भी तोहमत लगाई जाए, लेकिन धन का बहना रुक जाए तो अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है। अब दीपावली के सप्ताह की पहली ट्रेडिंग…औरऔर भी

अटल सत्य है कि शेयर बाज़ार के निवेश व ट्रेडिंग में भारी रिस्क है। इसे कोई मंत्र-तंत्र, विद्या या भगवान भी नहीं पलट सकता। हम अधिक से अधिक यही कर सकते हैं कि न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न की राह निकालें। बेंजामिन ग्राहम से लेकर वॉरेन बफेट जैसे सफलतम निवेशक और जॉर्ज सोरोस जैसे ट्रेडर यही करते रहे हैं। उन्हें भी नुकसान झेलना पड़ा है। लेकिन वे हमेशा अपनी पूंजी बचाकर चलते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बिजनेस चैनलों पर आने वाले एनालिस्टों का तो धंधा ही है हांकना और ऐसे दावे करना कि बाज़ार ठीकठाक कहां और किधर जाएगा। उन्हें इसी बात के नोट मिलते हैं। लेकिन हमारे आसपास ऐसे निवेशकों, ट्रेडरों व गुरुओं की कोई कमी नहीं जो सोशल मीडिया के साथ-साथ कहीं भी मिलने-मिलाने पर दावा करते हैं कि उन्हें बाज़ार की सटीक चाल पता है। उनका यह आत्मविश्वास अपने साथ औरों को भी डुबा डालता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी