हमारे शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भले ही सुबह 9.15 से शाम 3.30 बजे तक होती है। लेकिन ग्लोबल हो चुकी दुनिया में सारे वित्तीय बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की हलचलों से प्रभावित होते हैं। एशिया के तमाम बाज़ार हमसे पहले खुलते हैं। उसके बाद यूरोप में ट्रेडिंग शुरू होती है। फिर अमेरिका का बाज़ार सक्रिय हो जाता है। वित्तीय बाज़ार की धड़कन छुट्टियों के अलावा कभी नहीं रुकती। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वीतराग या वीतद्वेष हो जाने का मतलब जीवन से पलायन नहीं है। इस अवस्था में आप अपने मन के गुलाम नहीं, बल्कि उसके मालिक बन जाते हो। तब आप जीवन आवेश या आवेग में नहीं, नियम-धर्म से जीते हो। प्रकृति के नियमों को समझकर उनके माफिक चलने से आपको जीवन में सुख और सफलता मिलती है। इसी तरह यह अवस्था आपको शेयर बाज़ार के नियमों को समझकर उससे कमाने में मदद करती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

लालच और भय की भावना शेयर बाज़ार की पल-पल की गति का मुख्य कारक है। अमूमन हर कारोबारी इनके आवेग/आवेश में बहता रहता है। रिटर्न से राग और रिस्क से द्वेष। हर किसी को लाभ की तमन्ना और घाटे से घबराहट होती है। लेकिन जीवन की तरह यहां भी वही बराबर सफल होता है जो राग या द्वेष में समभाव रहता है। वह लाभ या घाटे को एक जैसी तटस्थता से देखता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कंपनियों के शेयरों के भाव उनके धंधे व मुनाफे के साथ दिशा पकड़ते हैं। लेकिन यह लंबे समय में होता है, जबकि छोटे समय यानी, कुछ दिन या महीनों में शेयरों के भाव उन्हें पकड़ने/छोड़ने की लालसा में लगे लाखों लोगों की लालच व डर की भावना से उछल-कूद मचाते हैं। एक ही वक्त कुछ लोग उनको हर हाल में खरीदने को लालायित रहते हैं, जबकि कुछ लोग बेचने पर उतारू रहते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार कठिन दौर से गुजर रहा है। भारी अनिश्चितता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम इसे और बढ़ा सकते हैं। शेयरों की चाल दिशाहीन है। मजबूत शेयर गिरने पर खरीदो तब भी गिर जाते हैं। ऐसे में ट्रेडिंग में कुछ दिन का विराम ज़रूरी हो गया। इसे देखते हुए सोमवार, 26 नवंबर से दस दिन की विपश्यना साधना पर जा रहा हूं। इसलिए अगला कॉलम सोमवार, 10 दिसंबर को आएगा। कल 25 नवंबर के बादऔरऔर भी

आखिर शेयर बाज़ार में सफलता का ‘ढाई आखर’ क्या है? यह कस्तूरी खुद आपके पास है। इसे बाहर ढूढना खुद को धोखा देना है। पहले जिन शेयरों में ट्रेड करना है, उनका स्वभाव समझिए। यह समझने में उनके भावों का पैटर्न राह दिखाएगा। पूंजी आपकी लगी है तो ट्रेड का रिस्क जितना आप समझ सकते हैं, उतना कोई दूसरा नहीं। यहीं से न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न का सूत्र पकड़ में आने लगेगा। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

गंवानेवालों में जिजीविसा की कमी नहीं। वे जीतने की हर विद्या सीखते हैं। टेक्निकल एनालिसिस और फिबोनाकी संख्याओं के जटिल समीकरण समझने के लिए इंटरनेट से लेकर किताबों तक की थाह लगा डालते हैं। हर तरफ गुरु तलाशते रहते हैं। लेकिन बाज़ी हाथ से फिसलती रहती है। उनके लिए कबीर का यह दोहा पूरा प्रासंगिक है कि पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़य सो पंडित होय। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

संख्या के लिहाज़ से देखें तो शेयर बाज़ार में गंवाने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि कमाने वालों की संख्या बेहद कम। हालांकि हर दिन नुकसान और फायदे की रकम ठीक बराबर होती है। मोटा आंकड़ा है कि शेयर बाज़ार में 95% लोग गंवाते हैं, जबकि मात्र 5% कमाते हैं। गंवाने वालों में अधिकांश रिटेल व नौसिखिया ट्रेडर होते हैं, जबकि कमाने वालों में ज्यादातर बैंक, वित्तीय संस्थाएं और प्रोफेशनल ट्रेडर हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार समेत किसी भी वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग एकदम ज़ीरो-सम गेम है। यहां कोई गंवाता है, तभी कोई कमाता है। इसलिए हर दिन जितने लोग दुखी रहते हैं, उतने ही लोग खुश रहते हैं। यहां ऐसा नहीं कि हर कोई बढ़ने पर ही कमाता है। बहुत-से ऐसे लोग हैं जो बाज़ार के गिरने पर कमाते हैं। दरअसल, गिरने पर कमानेवाले लोग ज्यादा ही कमाते हैं क्योंकि वे डेरिवेटिव्स में शॉर्टसेल करते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में देशी संस्थाओं में दो सबसे खास नाम हैं एलआईसी और म्यूचुअल फंडों के। ताज़ा उपलब्ध आंकडों के मुताबिक 30 सितंबर 2018 के अंत में म्यूचुअल फंडों के पास बाज़ार में लगाने के लिए 22.04 लाख करोड़ रुपए थे। वहीं, रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक एलआईसी ने मार्च 2018 के अंत तक शेयर बाज़ार में 24.15 लाख करोड़ रुपए लगा रखे थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़ा ही होगा। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी