हमारी अर्थव्यवस्था की हालत पतली है और अभी इसमें सुधार के कोई संकेत भी नहीं दिख रहे। फिर भी सेंसेक्स ने नया ऐतहासिक शिखर बना लिया तो इसकी सीधी-सी वजह है कि बाज़ार में जमकर धन आ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर में शेयर बाज़ार में 14,358 करोड़ रुपए डाले हैं जो चालू वित्त वर्ष 2019-20 में किसी भी महीने का अधिकतम निवेश है। म्यूचुअल फंड भी खरीदे जा रहे हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पूंजी निवेश के बड़े चक्र की शुरुआत आमतौर पर सरकारी क्षेत्र से होती है। आईआरसीटीसी के आईपीओ से इसका आगाज़ हो चुका है। अब भारतीय रेल रोलिंग स्टॉक और इंजिन व कोच उत्पादन के लिए दो होल्डिंग कंपनियां बनाने जा रहा है। इसके लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से इजाजत मिल गई है। जाहिर है कि यह माहौल निजी कंपनियों के निवेश को गति देगा। इन चीजों का असर अंततः शेयर बाज़ार पर पड़ेगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में जैसी कटौती की है, उससे भारत दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब बन सकता है। भारत इस पैमाने पर सिंगापुर व वियतनाम के बराबर आ गया है। इसलिए दुनिया की कंपनियां भारत का रुख कर सकती हैं। इससे यहां पूंजी-निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है। आज़ादी के बाद अब तक के सात दशक में बड़े पूंजी-निवेश के ऐसे छह चक्र चल चुके हैं। आगे सातवें की तैयारी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भारतीय अर्थव्यवस्था स्वस्थ बदलाव की दिशा में बढ़ रही है। खराब बैंक व वित्तीय कंपनियां खत्म हो रही हैं। अब तो जो एकदम फिट होंगे, वही टिक पाएंगे। सरकार भी उन धंधों से निकलती जा रही है जिसमें उसे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉरपोरेशन, बीईएमएल व शिपिंग कॉरपोरेशन जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से सरकार निकलने जा रही है। संक्रमण की पीड़ा जल्दी ही खत्म हो सकती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

समय का पहिया बिना रुके चलता जा रहा है। एक संवत बीता। दूसरा शुरू हुआ। भारतीय शेयर बाज़ार के कारोबारी विक्रम संवत के हिसाब से नया साल मनाते हैं। बीते विक्रम संवत 2075 में निफ्टी ने 10.8% और सेंसेक्स ने 9.8% रिटर्न दिया है। लेकिन यह बढ़त मुठ्ठी भर स्टॉक्स तक सीमित रही। इस दौरान शेयर बाज़ार के अधिकांश निवेशकों का पोर्टफोलियो इस कदर टूटा कि वे बीते संवत को भुला नहीं पाएंगे। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इस बार रीयल एस्टेट क्षेत्र दिवाली पर मात्र 20,849 नए मकान लॉन्च कर रहा है। यह संख्या पिछले साल 2018 की दिवाली की तुलना में मात्र एक-तिहाई है। तब भी लॉन्च हुई यूनिटों की संख्या 2017 से 25% कम रही थी। खास बात यह है कि इस बार लगातार सातवां त्योहारी सीजन है, जब रियल्टी कारोबार को सुस्ती का सामना करना पड़ा है। वैसे, बिल्डर ग्राहकों को पकड़ने पुरजोर कोशिश में लगे हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रियल्टी क्षेत्र की हालत कुछ ज्यादा ही खराब है। हालांकि चंदे की लालची सरकार उसकी मदद में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही। फिर भी देश में अनबिके मकानों की संख्या दस लाख से ज्यादा है। इनकी कीमत 6 लाख करोड़ रुपए के आसपास है। अधिकांश डेवलपर वित्तीय फांस में जकड़े हैं। न तो वे इन्वेंटरी निकाल पा रहे हैं और न ही फाइनेंस के अभाव में अपने प्रोजेक्ट पूरे कर पा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार में स्थिति यह है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, रिलैक्सो फुटवियर, सीमेंस, नेस्ले, एवेन्यू सुपरमार्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, वोल्टाज, बाटा व अडानी ग्रीन एनर्जी जैसी मुठ्ठी भर कंपनियों ने 52 हफ्ते का नया शिखर पकड़ा है। पर, बाज़ार में तलहटी तक गिरी कंपनियों की संख्या चोटी तक चढ़ी कंपनियों से कम से कम छह गुनी ज्यादा है। बड़ों को लेने का फायदा नहीं। छोटों के डूबते चले जाने का खतरा है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

त्योहारों का मौसम। दिवाली का हफ्ता चालू है। बताते हैं कि अमेजॉन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील पर जमकर सेल हो रही है। बॉलीवुड भी चमक रहा है। कुछ दिनों में ही मरजावां, हाउसफुल-4 और सांड की आंख जैसी कई फिल्में त्योहारी मूड को भुनाने के लिए बाज़ार में आ रही हैं। लेकिन गाड़ियों की बिक्री की मंदी टूट नहीं रही। घरों को खरीदनेवाले नहीं मिल रहे। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स व मोबाइल में खास बिक्री नहीं। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

रिटेल या आम ट्रेडर को शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में केवल 5% बचत लगानी चाहिए। लेकिन जो ज्यादा नेटवर्थ वाले लोग (एचएनआई) हैं, जिनके पास इफरात धन है, वे अपने निवेश सलाहकार या वित्तीय प्लानर से पूछकर जितना भी चाहें, उतना धन ट्रेडिंग में लगा सकते हैं। वैसे, देखा गया है कि बाज़ार में ज्यादातर रिटेल ट्रेडर ही डूबते हैं, जबकि एचएनआई ट्रेडर अधिक न भी कमाएं तो उनकी पूंजी सुरक्षित रहती है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी