जो जिंदगी सिखा देती है, वो किताबें कभी नहीं सिखा सकतीं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर दुनिया के कितने भी सफल ट्रेडरों की किताब पढ़ लीजिए, टेक्निकल एनासिसिस का महंगे से महंगा कोर्स कर लीजिए, फिबोनाची नंबरों का सारा गणित सोख लीजिए, लेकिन बाज़ार से नियमित कमाई का कौशल आपको अपने अनुभव से ही सीखना होता है। फिर एक बार सीख लिया तो वह साइकल या कार चलाने जैसा आसान हो जाता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

डर और चिंता की भावना का कोई तुक-तर्क नहीं होता। उन्होंने घेर लिया तो किसी दूसरे के समझाना कोई काम नहीं आता। सारा पढ़ा-लिखा भूल जाता है। तनाव चढ़ता ही चला जाता है। इससे मुक्ति के लिए हमें खुद डर व चिंता की भंवर से निकलना पड़ता है। यह आसान नहीं। लेकिन आसान काम यह है कि हम जब भी चिंताग्रस्त या डरग्रस्त हों तो वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से एकदम दूर रहें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बुद्धि के साथ रहना है है कि खुद को भावनाओं में बहकने से बचाना पड़ेगा। भावनाएं भी बहुत सारी नहीं। केवल लालच और डर की भावना को साधना है। साथ ही अपने अहं की भावना पर काबू पाना है। भावनाओं पर काबू पाने के लिए अपने स्वभाव को समझना ज़रूरी है। फिर इसे समझने के बाद उसमें आवश्यक बदलाव करने होंगे। तरीका यह भी है कि अपने स्वभाव के माफिक स्टॉक्स चुने जाएं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सारा खेल अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए दूसरों की भावनाओं को समझने और उसका फायदा उठाने का है। यह सुनने में बड़ा निर्मम लगता है। लेकिन युद्ध और बाज़ार में ऐसी ही निर्ममता चलती है। दूसरों की भावना भावों के चार्ट पर दिख जाती है। चार्ट देखना आ जाए तो आपको साफ दिखने लगेगा कि कहां भावनाएं और कहां बुद्धि सक्रिय है। आपको हमेशा बुद्धि के साथ रहना है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भावनाएं अस्थिर हों, किसी भी वजह से उनमें उबाल या सुस्ती आई हो तो हमारी बुद्धि नहीं काम करती। हम अधीर हो जाते हैं। यह ऐसी अवस्था है जब कोई भी वित्तीय बाज़ार में आपको शिकार बना सकता है, भले ही आप कितने बड़े महारथी क्यों न हों। इसीलिए नियम है कि जब भी घर-परिवार या दोस्तों से झगड़ा हुआ हो, तब ट्रेडिंग से दूर रहें। अन्यथा, आप अपना नुकसान कर बैठते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भावनाओं का सारा समीकरण बाज़ार के भावों में दिख जाता है। इनका सारा ग्राफ भावों के दैनिक और साप्ताहिक चार्ट में झलकता है। ऊपर से कुछ दिन, हफ्तों, महीनों व सालों के मूविंग औसत का गणित बाज़ार में सक्रिय भावनाओं का सामूहिक पैटर्न बता देता है। दस-बीस साल पहले यह हिसाब-किताब लगाना बेहद कठिन था। आज सब कुछ कंप्यूटर के चंद बटन कर देते हैं। हमारा काम बुद्धि और धैर्य का इस्तेमाल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का स्वरूप गणितीय है। लेकिन वहां हर पल काम करनेवाली मानव भावनाएं अक्सर सारा गणित फेल कर देती हैं। कहने का मतलब यह नहीं कि भावनाओं का कोई गणित या समीकरण नहीं होता। डर और लालच की भावना का तो सीधा गणित होता है। लेकिन जब ये शेयर बाज़ार में काम करती हैं, जहां आज एक नहीं, अनेक देशों के लाखों ट्रेडर सक्रिय होते हैं तो समीकरण रैखिक नहीं रह जाता। अब सोमवार का व्योम…और भीऔर भी

शेयर बाज़ार का स्वरूप गणितीय तो है। लेकिन इसमें शिरकत करनेवाला हर शख्स गणितीय नहीं होता। सभी यहां अपनी भावनाओं के साथ आते हैं। घुसते हैं लालच की भावना लेकर और भागते हैं डर की भावना में बहकर। इन्हीं दो भावनाओं की लहरों पर बाज़ार हर दिन चलता है। कभी ऊपर तो कभी नीचे। इस ऊंच-नीच और मानव स्वभाव की लय के गणित को जो आत्मसात कर लेता है, वही यहां जीतता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार समेत सारी वित्तीय बाजार का स्वरूप गणितीय है। यह बाज़ार में भाग लेनेवालों के खरीदने और बेचने के फैसलों का प्रभावी परिणाम होता है, योगफल नहीं। खरीदने वाले ने जितना दिया, बेचने वाले ने जितना पाया, उसका जोड़ शून्य निकलता है। हां. बिचौलियों का कमीशन ज़रूर दोनों की जेब से निकल जाएगा। लेकिन खरीदने की लालसा ज्यादा है कि बेचने की बेचैनी, इसी से भाव उठते-गिरते हैं, बाज़ार चलता है। अब गुरु की दशा-दिशा…और भीऔर भी

शेयर बाज़ार के बारे में बाहर के लोगों ने बहुत सारी कहानियां, बहुत सारी धारणाएं फैला रखी हैं। इनमें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कभी बाज़ार में गहरे धंसे ही नहीं। आए भी तो सतह पर छिछली खिलाकर चले गए। यह न तो जुए का अड्डा है, न ही कैसिनो को खेल। यहां पक्का कुछ नहीं तो प्रायिकता समझकर अनुमान लगाना पड़ता है। लेकिन अंधेरे में तीर चलाना कतई नहीं फलता। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी