सभी वित्तीय बाज़ार आपस में जुड़े हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। इसलिए शेयर बाज़ार का ट्रेडर खुद को शेयर बाज़ार तक सीमित रखे तो शेयरों की गति का सबब नहीं जान सकता। मसलन, इस समय बॉन्ड के भाव घट रहे है तो उन पर यील्ड बढ़े जा रही है। नतीजतन, ब्याज दर बढ़ सकती है तो धन का प्रवाह घटने के भय से शेयर बाज़ार दबाव में है। कल तुर्की की मुद्रा लीरा केंद्रीय बैंकऔरऔर भी

अपने यहां मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता व बेंगलुरु जैसे महानगरों ही नहीं, जयपुर, लुधियाना, कानपुर व मेरठ जैसे शहरों के साथ-साथ देश के कस्बों और गांवों तक में बेरोजगार व कम कमानेवाले लोगों को शेयर बाज़ार का चस्का लगा हुआ है। लेकिन उन्हें नहीं पता कि वित्तीय बाज़ार की दुनिया में शेयर बाज़ार सबसे छोटा है। विदेशी मुद्रा या करेंसी बाज़ार सबसे बड़ा है। वो शेयर बाज़ार से 100-200 गुना है, जबकि बॉन्ड बाज़ार 50-70 गुना औरऔरऔर भी

जो ट्रेडर सेबी के नए नियम के माफिक ज्यादा मार्जिन मनी नहीं दे पा रहे, ब्रोकर उनकी पोजिशन कम कर दे रहे हैं। जाहिर है कि वित्त वर्ष के आखिरी महीने में पहले से धन की तंगी से जूझ रहे ट्रेडर की लॉन्ग या खरीदने की पोजिशन घटती जा रही हैं। नतीजतन बाज़ार बढ़ते-बढ़ते दब जा रहा है। कुछ दिनों से यही सिलसिला जारी है। सुबह बढ़कर खुला बाज़ार दोपहर बाद घाटे में चला जाता है। आखिरीऔरऔर भी

खरीदने के सौदे ज्यादा होगे तो बाज़ार में सक्रियता बढ़ेगी। लेकिन इधर पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी ने पहली मार्च के पीक मार्जिन की सीमा घटा दी है। पहले इंट्रा-डे में निफ्टी का एक लॉट करने के लिए कोई अपने ब्रोकर के पास डेढ़ लाख रुपए मार्जिन मनी रखता था तो वह दरअसल चार लॉट की पोजिशन बना सकता था। लेकिन अब सेबी के नए नियम के मुताबिक वह दोगुना या दो लॉट की ही पोजिशन बनाऔरऔर भी

इस समय देश में बाहर से आ रहे धन की कोई कमी नहीं। म्यूचुअल फंड भी बाज़ार में धन लगाने को आतुर हैं। लेकिन बाकी ट्रेडरों के पास धन की तंगी है। दो दिन पहले ही अन्य व्यापारियों, कॉरपोरेट इकाइयों व बिजनेस करनेवालों की तरह उन्होंने मौजूदा वित्त वर्ष के एडवांस टैक्स की आखिरी किश्त भरी होगी। सालाना 10,000 रुपए से ज्यादा की करदेयता वाले सभी लोगों को एडवांस टैक्स भरना होता है। इधर, पहली मार्च सेऔरऔर भी

बाज़ार भले ही ऊपर-नीचे होता रहे। लेकिन अमूमन प्रोफेशनल व बड़े ट्रेडर मार्च अंत तक शॉर्ट सेलिंग से परहेज़ करते हैं। असल में वे जिस तरह उधार पर धन लेकर बाज़ार में लगाते रहते हैं, वह सुविधा इस दौरान काफी कम हो जाती है। कहीं से उधार पर धन जुटाना मुश्किल हो जाता है। वित्त वर्ष का अंत होता है तो हर कोई अपना एकाउंट बराबर करने में लगा रहता है। ट्रेडर नया लोन लेने के बजायऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2020-21 का आखिरी महीना। एक महीने से निफ्टी लगातार 40 से ज्यादा पी/ई पर ट्रेड हो रहा है केवल एक दिन 26 फरवरी को छोड़कर, जब वो 39.65 के पी/ई पर था। क्या हमारा शेयर बाज़ार कुछ ज्यादा ही फूल गया है और उसका गुब्बारा कभी भी फट सकता है? शायद नहीं, क्योंकि जब तक बाज़ार में धन आता रहेगा, तब तक वह फूलता ही जाएगा। अमूमन, वित्त वर्ष के आखिरी महीने में धन काऔरऔर भी

कितने शेयरों में ट्रेड करना है, इसे अपनी पूंजी व रिस्क क्षमता के मद्देनज़र पहले से तय कर लें। इससे इधर-उधर नहीं। 50-100 शेयरों में ट्रेड करने का अनुशासन बनाया है तो उसका दृढ़ता से पालन करें। अगर लालच में आकर 500 शेयरों का सौदा कर लिया और वह किसी वजह से उल्टा पड़ गया तो 50-50 के दस या 100-100 के पांट सौदों का मौका ही खाएगा, बल्कि पहले कमाए लाभ को भी चट कर सकताऔरऔर भी

फाइनेंस की दुनिया कभी रुकती नहीं। दुनिया के बाज़ारों पर नज़र रखते हुए सुबह-सुबह अंदाज़ लें कि आज बाज़ार की दशा-दिशा क्या रह सकती है। अगर पता न लग सके या बाज़ार अनुमान से उल्टी दिशा में चला जाए तो ट्रेडिंग न करें। दरअसल, रिटेल ट्रेडर के पास पूंजी और रिस्क लेने की क्षमता कम होती है। स्टॉक्स के लॉन्ग सौदे ही उसके लिए सुरक्षित होते हैं। इसलिए वह चाहकर भी शॉर्ट सेलिंग नहीं कर पाता तोऔरऔर भी

हर दिन ट्रेडिंग करना कतई ज़रूरी नहीं। मन अशांत या ज्यादा ही उत्साह से भरा हो, उस दिन ट्रेडिंग न करें। अचानक किसी दिन जमकर कमा/गंवा लिया तो अगले दिन ट्रेडिंग न करें क्योंकि सफलता/विफलता का झटका ऐसा संतुलन बिगाड़ सकता है कि आप जो जैसा है, उसे वैसा नहीं देख पाएंगे। घर में झगड़ा हुआ हो, उस दिन ट्रेडिंग न करें। बजट या मौद्रिक नीति जैसी खबरों, कंपनी के तिमाही नतीजों या डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरीऔरऔर भी