इस समय हमारा शेयर बाजार रिटेल निवेशकों के हाथ में है। इनमें से अधिकांश 18 से 35 साल के नौजवान हैं। वे बाज़ार में तुरत-फुरत फायदा कमाने के लिए उतरे हैं। किसी फंडामेंटल या टेक्निकल एनालिसिस, देश-विदेश की राजनीति या धन के वैश्विक प्रवाह नहीं, बल्कि इधर-उधर की टिप्स या इन्ट्यूशन के आधार पर खरीदते-बेचते हैं। फिर थोड़ा-सा मुनाफा काटकर निकल जाते हैं। इन पतंगों का शिकार करने के लिए बहुतेरी छिपकलियां बाहर निकल आई हैं। दिक्कतऔरऔर भी

शेयर बाज़ार इस समय एफआईआई, डीआईआई और ब्रोकरों की प्रॉपराइटरी फर्मों से निकलकर रिटेल ट्रेडरों के हवाले हो गया है। बड़े संस्थागत निवेशक कोई दांव नहीं खेलना चाहते, जबकि रिटेल ट्रेडरों ने बदहवास होकर उछल-कूद मचा रखी है। हर्षद मेहता से लेकर 1998 का दक्षिण-पूर्व एशिया के मुद्रा संकट और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट तक का सबक हमारे पास है कि ऐसे ही दौर में बाज़ार खटाक से ज़मीन पकड़ लेता है। जब तक दूसरे मूर्खऔरऔर भी

प्रोफेशनल ट्रेडर की खासियत है कि वे बाज़ार की स्थिति को हमेशा बिना किसी पूर्वाग्रह के, जो जैसा है, वैसा समझने में लगे रहते हैं। मसलन, इधर एफआईआई ने निफ्टी फ्यूचर्स में अपना एक्सपोज़र अप्रैल के शिखर से करीब-करीब 60% घटा दिया है। स्टॉक फ्यूचर्स में भी वे एक्सपोज़र लगभग एक-तिहाई घटा चुके हैं। ब्रोकरों के प्रॉपराइटरी ट्रेड पर गौर करें तो वे भी निफ्टी फ्यूचर्स के गिरने के अनुमान के साथ सौदे करते दिख रहे हैं।औरऔर भी

प्रोफेशनल ट्रेडर भी रिटेल ट्रेडर की ही श्रेणी में गिने जाते हैं। लेकिन वे किसी इन्ट्यूशन या टिप्स पर नहीं, बल्कि अपना अलग सिस्टम बनाकर ट्रेड करते हैं। यह सिस्टम मोटे तौर पर टेक्निकल एनालिसिस पर आधारित होता है। मगर हर प्रोफेशनल ट्रेडर अपने हिसाब से इंडीकेटर चुनता और कुछ नई ‘विद्या’ जोड़ता है। मसलन, भावों के चार्ट से यह पढ़ना कि किसी स्टॉक में संस्थागत निवेशक कब खरीद-बिक्री शुरू करते हैं। वे अपने अभ्यास, रुझान वऔरऔर भी

बुलबुले के फटने की तमाम आशंकाओं को धता बताते हुए दुनिया के साथ भारतीय शेयर बाज़ार भी इस समय बढ़े चले जा रहा है। बीच-बीच में दम मारने जैसे मामूली करेक्शन आते रहते हैं। लेकिन हम कैश और डेरिवेटिव सेगमेंट में एफआईआई, डीआईआई और प्रॉपराइटरी फर्मों की खरीद-फरोख्त पर ध्यान दें तो उनकी सक्रियता का पैटर्न पिछले एक महीने से बदलता हुआ नज़र आ रहा है। वे काफी सतर्कता बरते रहे हैं, जबकि रिटेल ट्रेडर एकदम बेपरवाहऔरऔर भी

जिस तरह युद्ध में कभी दोनों पक्ष नहीं जीतते, हमेशा एक पक्ष जीतता और दूसरा हारता है, उसी तरह शेयर बाज़ार में हमेशा एक की जीत और दूसरे की हार होती है। इसलिए मैदान में उतरी पैदल सेना को पता होना चाहिए कि उसका मुकाबला किन-किन महारथियों से है। रिटेल ट्रेडर को जानना ज़रूरी है कि उसका मुकाबला तीन प्रमुख संगठित शक्तियों या महारथियों से है। ये हैं विदेशी संस्थागत निवेशक या एफआईआई, देशी निवेशक संस्थाएं याऔरऔर भी

आपने ध्यान दिया होगा कि कभी-कभी ढाई बजे के आसपास शेयर बाज़ार का रुख एकदम पलट जाता है। निफ्टी/सेंसेक्स अचानक दिशा बदल लेते हैं। यह बाज़ार में सुनियोजित बिकवाली या खरीद का प्रभाव है। जानकार लोग इसे फैंटम प्रभाव कहते हैं। इसमें ऑपरेटर या बड़े देशी संस्थान चुनिंदा सौदों से चंद मिनट में बाज़ार का रुख बदल देते हैं। वे निफ्टी/सेंसेक्स के शेयरों में से चार-पांच को चुनकर खरीद-बिक्री का ऐसा खेल करते हैं कि व्यापक बाज़ारऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में लंच-टाइम में अल्गोरिदम बनाकर सौदा करनेवाले ट्रेडर बड़े उस्ताद होते हैं। उनके जटिल खेल का अंदाज़ा तब लगता है जब स्टॉक्स के भावों में काफी उतार-चढ़ाव के चलते दूसरे ट्रेडरों के स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने लगते हैं। समझदार ट्रेडर हमेशा स्टॉप-लॉस का पालन अनुशासन व कड़ाई के साथ करते हैं। लेकिन लंच-टाइम में जब वोल्यूम कम और ओपन इंटरेस्ट घट रहा होता है, तब भावों के पैतरों को देखकर उस्तादों के भी होश फाख्ता होऔरऔर भी

कहा जाता है कि शेयर बाज़ार खोलते हैं नौसिखिया रिटेल ट्रेडर, जबकि बंद करते हैं प्रोफेशनल ट्रेडर। लंच के दौरान शेयर बाज़ार में अमूमन सन्नाटा रहता है। अधिकांश लोग निश्चित समय पर एकदम निश्चिंत होकर लंच करते हैं। केवल अल्गोरिदम ट्रेडिंग चलती है। यह सिस्टम आधारित ऑर्डर एंट्री होती है जिन्हें ग्रे व ब्लैक बॉक्स से जुड़े सॉफ्टवेयर मशीनी ढंग से पूरा करते हैं। करीब एक से ढाई बजे तक बाज़ार का वोल्यूम काफी घट जाता है।औरऔर भी

थोड़ी-सी पूंजी और बहुत सारे ख्वाब लेकर शेयर बाजार में उतरे हमारे-आप जैसे रिटेल ट्रेडर बड़ी बेचैन आत्मा होते हैं। मन में कोई स्टॉक कौंधा तो लगता है कि फटाफट खरीद लिया जाए, अन्यथा हाथ से निकल जाएगा। वहीं, जिन ट्रेडरों को घाटा लग रहा होता है, वे सुबह-सुबह सौदे से निकलकर अपना घाटा कम से कम के लिए व्यग्र रहते हैं। दरअसल, हर दिन शेयर बाज़ार के शुरुआती घंटे ऐसी ही बेचैन आत्माओं के लिए होतेऔरऔर भी