समझें बाज़ार की गरिमा व महिमा
बाज़ार अगर जाति-धर्म या पद-पदवी का भेद करे तो चल ही नहीं सकता। इसी के पूरक के बतौर लोकतांत्रिक व्यवस्था निकली है। बाज़ार का ही कमाल है कि आज कोई भी शख्स तमाम बड़ी कंपनियों के मालिकाने का हिस्सा खरीद सकता है। लेकिन यही प्रोत्साहन खेती में गायब है। अगर आप किसान नहीं हैं तो महाराष्ट्र या गुजरात जैसे देश के कई राज्यों में खेती के लिए ज़मीन नहीं खरीद सकते। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
