हर कंपनी कोई न कोई धंधा करती है। कुछ धंधे ऐसे होते हैं जो काल के गाल में समा जाते हैं। जैसे, कैसेट और वीसीआर का धंधा एकदम मिट गया। लेकिन दवा और साबुन, टूथपेस्ट जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों का धंधा ऐसा है जिसमें कभी मंदा नहीं आ सकता। हिदुस्तान यूनिलीवर नहीं तो पतंजलि आ जाएगी। धंधे और भी हैं जिनकी मांग कभी खत्म नहीं होती। तथास्तु में आज ऐसे ही सदाबहार धंधे में लगी एक कंपनी…औरऔर भी

हम जो कर रहे हैं, उसको जिस हद तक नहीं जानते, उतना ही उसमें रिस्क होता है। शेयर बाजार में निवेश करते समय यह बात दिमाग में भलीभांति बैठा लेनी चाहिए। हम अक्सर किसी के महज कहने पर अपनी बचत लगा देते हैं, बिना कायदे से जाने कि जिस कंपनी में हम निवेश कर रहे हैं वो करती क्या है। सोचिए कि अगर आप उदयमी होते तो क्या वह कंपनी बनाते? तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

इस साल 29 फरवरी को निफ्टी 6826 पर था। बढ़कर 7 जून को 8295 तक जा पहुंचा। 1469 अंक ऊपर। बीते हफ्ते दो बड़ी घटनाओं में यह इसका आधा, 735 अंक गिरकर 7560 पर आ गया होता तो अच्छी बात होती। लेकिन राजन के मामले पर वो गिरा ही नहीं; ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से निकलने पर 181.85 अंक ही गिरा। और गिरता तो अच्छे शेयर सस्ते हो गए होते! अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

जीडीपी के आंकड़े बढ़ा देने से अर्थव्यवस्था नहीं बढ़ती, बल्कि अर्थव्यवस्था के बढ़ने से सही मायनों में जीडीपी बढ़ता है। ऐसा होने पर कंपनियों का बिजनेस बढ़ता है और साथ ही बढ़ जाता है उनका मुनाफा। यही मुनाफा उनके शेयरों के भाव बढ़ाता है। कुछ कंपनियां होती हैं जो कमाए गए लाभ का बड़ा अंश शेयरधारकों को बतौर डिविडेंड दे देती हैं। इससे उनका शेयर और ज्यादा चमक जाता है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

इंसानों का काम मशीनें करने लगें तो लोग क्या करेंगे? हाल की खबर है कि विप्रो 3000 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का काम कृत्रिम इंटेलिजेंस से करवाने जा रही है। इसी 5 जून को स्विटज़रलैंड के 76.9% लोगों ने हर देशवासी को सम्मान सहित जीवन जीने के लिए बुनियादी आय देने का प्रस्ताव खारिज़ कर दिया। मगर, जब तक लोगों की ज़रूरतें रहेंगी, उत्पादन इंसान करे या मशीनें, कंपनियां तो बनी ही रहेंगी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

मानसून, ब्याज दर, मुद्रास्फीति, डॉलर के मुकाबले रुपया, जिंसों के भाव और जीडीपी का बढ़ना या घटना ऐसे कारक हैं जो शेयर बाज़ार व शेयरों के भावों को क्षणिक रूप से चंद दिन या महीने भर के लिए प्रभावित करते हैं। लेकिन लंबे समय में कंपनी के बिजनेस की मजबूती और प्रबंधन का दमखम ही शेयरों के भाव को प्रभावित करता है। इसीलिए ट्रेडर के विपरीत निवेशक को हमेशा दूर की सोचनी चाहिए। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

इतिहास गवाह है कि रोम एक दिन में नहीं बनता। न ही हमारे गांवों में पुराने ज़माने के मिट्टी के घर एक झोंक में बन जाया करते हैं। मिट्टी का एक रदा रखो। उसे सूखने दो। फिर अगला रदा रखो। अच्छे निवेश के लिए भी ऐसा ही धैर्य चाहिए। अच्छी से अच्छी कंपनी में भी एकमुश्त निवेश नहीं जमता। थोड़ा अभी, बाकी भावों की लहर माफिक स्तर तक गिरने पर। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

जो कंपनियां विदेशी बाज़ार पर निर्भर हैं, उनके लिए देश का सूखा खास मायने नहीं रखता। मगर, जो कंपनियां घरेलू बाज़ार पर निर्भर हैं, उनके लिए मानसून का खराब रहना बहुत मायने रखता है। गांवों और खेती-किसानी की हालत खराब होने से बिक्री से लेकर उनके मुनाफे तक को चोट लगती है। लेकिन आशा है कि दो साल बाद इस बार मानसून औसत से बेहतर रहेगा। तथास्तु में आज ऐसी कंपनी, मानसून जिसे गर्दिश से निकाल देगा…औरऔर भी

80-85% भारतीयों के पास ज़रूरी खर्चों को पूरा करने के बाद इतना नहीं बचता कि भविष्य के लिए अलग से बचा सकें। इसीलिए बीमा व पेंशन जैसी सरकारी स्कीमों के ज़रिए सामाजिक सुरक्षा की बड़ी ज़रूरत है। फिर भी निवेश की इस धारणा पर हमें सोचना चाहिए कि खर्च के बाद जो बचे, उसे बचाने के बजाय, बचाने के बाद जो बचे, उसे ही खर्च करना चाहिए। अब तथास्तु में बचत को दौलत बना सकनेवाली एक कंपनी…औरऔर भी

दस साल पहले घी का दाम 120 रुपए/किलो, सोने का दाम 8500 रुपए/दस ग्राम और सेंसेक्स 12,000 अंक पर था। इस समय घी 450 रुपए, सोना 30,000 रुपए और सेंसेक्स 25,225 पर है। इस तरह इन दस सालों में घी 275%, सोना 253% और सेंसेक्स 113% बढ़ा है। सेंसेक्स का इन तीनों में सबसे कम बढ़ना दिखाता है कि अर्थव्यवस्था में दौलत का सृजन नहीं हो रहा है। तथास्तु में आज की कंपनी दौलत बनाने के लिए…औरऔर भी