जब महंगाई लगातार बढ़ रही हो और मुद्रास्फीति घटने के बावजूद 5-6% की दर से चढ़ रही हो तब वस्तुओं के दाम से लेकर रिटर्न तक को हमें मुद्रास्फीति की दर घटाकर देखना चाहिए। यहीं, टाइम वैल्यू ऑफ मनी या धन के समय मूल्य की अवधारणा काम आती हैं। निवेश में समय और भाव महत्वपूर्ण है। लेकिन भाव को ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि उसके समय मूल्य के आधार पर देखा जाना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

देश की आबादी अभी 132.68 करोड़ है, जबकि शेयर बाज़ार में पंजीकृत निवेशकों की संख्या 3.19 करोड़ है। यानी, 2.4% भारतीय ही शेयरों में निवेश करते हैं। शहरों के गली-मोहल्लों में जिस तरह गरीब से गरीब लोग लॉटरी खेलते दिखते हैं, उससे लगता है कि लॉटरी खेलने वालों की संख्या दस करोड़ तो होगी ही। ध्यान दें कि लॉटरी भविष्य से खिलवाड़ है, जबकि शेयरों में हम भविष्य से खेलते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अतीत व वर्तमान के सारे तथ्य जुटा लेने के बावजूद हम अक्सर फैसला नहीं कर पाते क्योंकि भविष्य में क्या होगा, नहीं जानते। जो हुआ नहीं है, उसका पता लगाया भी कैसे जा सकता है! फिर धंधे का प्रबंधन किसी और के हाथों में हो, तब भविष्य आंकने में ज्यादा ही अनिश्चितता है। यही है शेयरों में निवेश का रिस्क। हां, हमें अपने तथ्य व तर्क जरूर सही रखने पड़ते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

हम जितनी ज्यादा गंभीरता से जितनी ज्यादा संभावनामय कंपनियां आपके निवेश के लिए पेश करते हैं, दूसरा कोई नहीं करता। हमारे दाम का भी कोई जोड़ नहीं। लेकिन उस निवेश को प्रतिफल में बदलना आपके जोखिम उठाने पर निर्भर करता है। कंपनियां कभी-कभी भावी गणना पर खरी नहीं उतरतीं तो उनसे निकलना भी आप पर है। बताते हैं हम, रिस्क उठाकर कमाते हैं आप। कंपनियां भी रिस्क लेकर चमकती हैं। तथास्तु में आज एक ऐसी ही कंपनी…औरऔर भी

बचत व निवेश हम इसीलिए करते हैं ताकि संकट के समय सांसत में न फंस सकें। लेकिन संकट के समय में दो सबसे ज्यादा काम आनेवाली चीजें हैं कैश व साहस। साहस हमारे स्वभाव का हिस्सा है जो प्रतिकूलता से  जूझते हुए स्वाभाविक रूप से आकार लेता है। लेकिन कैश हमें बराबर संभालकर रखना पड़ता है और अधिकांश  निवेश ऐसे माध्यमों में करना चाहिए जिसे हम फौरन कैश में बदल सकें। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अच्छी कंपनी उतनी ही मेहनत में ज्यादा मूल्य पैदा कर लेती है। विकसित देश वो है जो एकसमान मेहनत व संसाधनों में ज्यादा मूल्य सृजित करता है। साथ ही समान मेहनत के वो ज्यादा दाम देता है। अपने यहां कामगार को ज्यादा वेतन देता है और समाज में ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध कराता है। विकास का तब तक कोई मतलब नहीं है, जब तक वो मूल्य नहीं पैदा करता। तथास्तु में विकास व मूल्य-सृजन में लगी एक कंपनी…औरऔर भी

निवेश और धंधे की बात आती है तो देश या राष्ट्रवाद की सारी सीमाएं टूट जाती हैं। लाखों विदेशी निवेशक अपने देश के बजाय आज भारत जैसे उभरते देशों में इसीलिए निवेश कर रहे हैं क्योंकि यहां कहीं ज्यादा रिटर्न मिल रहा है। असल में निवेश करते वक्त स्वदेशी और विदेशी कंपनियों का फर्क मिट जाता है। जिसके धंधे में अच्छी संभावना है, वहां निवेश करना लाभदायी होता है। आज तथास्तु में पेश है एक बहुराष्ट्रीय कंपनी…औरऔर भी

समाज व राजनीति की तरह शेयर बाज़ार में भी ठगों की कमी नहीं। लंबी हांकना इनकी फितरत है। भावनाओं को हवा देकर ये अपना शिकार करते हैं। शेयर बाज़ार में इसका खास तरीका है मल्टी-बैगर का। फेंकते हैं कि फलानां शेयर कुछ महीनों-साल में कई गुना हो जाएगा। यह बहुत बड़ा फ्रॉड और घोटाला है क्योंकि पहले से बताना असंभव है कि कोई शेयर इतने साल में इतना गुना हो जाएगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाजार से कमाना अस्थिर मन के लोगों के वश की बात नहीं। इसके लिए साधक जैसा शांत मन चाहिए। जिस तरह पहले साधकों का ध्यान भंग करने के लिए रम्भा व मेनका जैसी अप्सराएं भेजी जाती थीं, उसी तरह इस समय निवेशकों को ध्यान भंग करने के लिए राकेश झुनझुनवाला जैसे नाम उछाले जाते हैं। ऐसे नामों की बेवसाइटों से निवेशकों को छला जाता है। इनके झांसे में ना आएं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

जो शेयर उठकर गिरता है, वो कहां तक गिरेगा, कोई भरोसा नहीं। लेकिन जो गिरकर उठता है, उसके बारे में इतना माना जा सकता है कि वो पिछले उच्चतम स्तर तक चला जाएगा। हम तथास्तु में आज जिस कंपनी के बारे में लिखने जा रहे हैं, वो सरकारी और सुरक्षित कंपनी है। उसके बारे में हमने निवेश की पहली सलाह करीब सवा साल पहले दी थी। लेकिन तब से वो काफी गिरने के बाद उठान पर है…औरऔर भी