देश में अच्छे लोगों की कमी नहीं है। लेकिन हमारी राजनीति में अच्छे लोगों को बहुत कम भाव मिलता है। हालांकि दिल्ली में अचानक ऐसे अच्छे लोग राजनीति में छा जाते हैं। शेयर बाज़ार में भी इस समय बहुत सारी अच्छी कंपनियों को भाव नही मिल रहा। लेकिन यकीन मानें कि जल्दी ही दिल्ली की राजनीति की तरह इन्हें भी इनका अंतर्निहित भाव मिलना शुरू हो जाएगा। आज तथास्तु में ऐसी ही संभावनामय, मगर दबी हुई कंपनी…और भीऔर भी

बजट ने अर्थव्यवस्था को भले ही निराश किया हो, लेकिन शेयर बाज़ार थोड़ा-सा झटका खाने के बाद दोबारा बजट-पूर्व स्थिति में आ गया। सेंसेक्स अब भी 24.49 के पी/ई पर ट्रे़ड हो रहा है, जबकि उसका दीर्घकालिक औसत पी/ई अनुपात 18-19 गुने का है। जाहिर है कि निवेश की माकूल रेंज में आने के लिए बाज़ार को 25% से ज्यादा गिरना होगा। क्या यह संभव है? न भी संभव हो तो पेश हैं निवेश लायक दो कंपनियां…और भीऔर भी

शेयर बाज़ार में तीन तरह की कंपनियां। पहली, जिनके शेयर बराबर चढ़ रहे हैं और तभी  तभी गिरते हैं जब धंधे या प्रबंधन पर चोट लग जाए। दूसरी, जिनके शेयर बंधे दायरे में भटक रहे हैं। तीसरी, जिनके शेयर लगातार गिरे जा रहे हैं और तभी उठते हैं जब उनसे जुड़ी कोई बड़ी अच्छी खबर आ जाए। पहली ट्रेडिंग के लिए मुफीद। तीसरी लंबे निवेश के लिए। मगर, बीच वाली बेकार। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी

कंपनियों की मूलभूत मजबूती कभी-कभी उनके शेयरों के भाव में नहीं झलकती। ऐसा प्रायः कम अवधि, कुछ महीने या साल तक होता है। लंबी अवधि में शेयरों के भाव कंपनी की मजबूती पकड़ लेते हैं। इसीलिए लंबी अवधि का निवेश छोटी अवधि की ट्रेडिंग से कम रिस्की होता है। इस पर अगर कंपनी के पास विपुल आस्तियां हों तो अंततः उसका दम शेयरों में दिख ही जाता है। तथास्तु में आज ऐसी ही विपुल आस्तियों वाली कंपनी…औरऔर भी

निवेश का कोई सुनहरा क्षितिज नहीं, जिसके पार अच्छे ही अच्छे अवसर हों। हर निवेश में रिस्क है। यह रिस्क शेयरों में सर्वाधिक है। बैंक जमा का रिस्क पीएमसी बैंक ने साफ कर दिया। इसलिए ‘2020 के ट्वेंटी-ट्वेंटी’ महज जुमला है। फिर भी ज़माने के साथ चलना है तो हम भी आज तथास्तु में नए साल के लिए 20 स्टॉक्स पेश कर रहे हैं। इन सभी पर यहां पहले विस्तार से लिखा जा चुका है।और भीऔर भी

शेयर बाज़ार चढ़ता ही जा रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था डूब रही है। यह हमारे या आपके लिए ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यन तक के लिए दुरूह पहेली है। उन्होंने गुरुवार को आईआईएम अहमदाबाद में फाइनेंस, अर्थव्यवस्था व मार्केटिंग में बर्ताव संबंधी विज्ञान के एनएसई केंद्र के उद्घाटन करते हुए छात्रों से कहा कि यह पहेली सुलझा लो तो वे अमेरिका से उनके पास आ जाएंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था के आंकड़े जो निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह नौकरीपेशा लोगों से लेकर काम-धंधे में लगे उद्यमियों तक में झलकने लगी है। कहीं से उजाले की किरण नहीं दिख रही। औद्योगिक उत्पादन व रोज़गार घटने के बाद अब मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी है। लेकिन इस निराशा के बीच याद रखें कि 1991 में तो इससे कहीं ज्यादा बदतर स्थिति थी। इसलिए निवेश के मौके अब भी हैं। आज तथास्तु में ऐसा ही एक मौका…और भीऔर भी

न जीवन और न ही बाज़ार में हमेशा मनचाहा होता है। सभी चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़े। लेकिन लगातार सात तिमाहियों से उसकी विकास दर घटती जा रही है। उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक विकास को बढ़ाने के लिए ब्याज घटा देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हर कोई चाहता है कि जिन शेयरों में उसने धन लगाया है, वे बराबर बढ़ते रहें। लेकिन ऐसा नहीं होता। निवेश की इस हकीकत के बीच एक और कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के शीर्ष सूचकांक निफ्टी व सेंसेक्स दोनों जब नए ऐतिहासिक शिखर पर हों, तब इनमें शामिल किसी ब्लूचिप कंपनी के शेयर का साल भर में 14% से ज्यादा गिर जाना गले नहीं उतरता। वह भी तब, जब वह निफ्टी-50 में अकेले 4.5% वजन रखती है और उसी की समकक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनी का शेयर साल भर में 15% से ज्यादा बढ़ चुका है। आज तथास्तु में वही ब्लूचिप कंपनी जो निफ्टी-50 से लगभग 28% सस्ती है…औरऔर भी

जब भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर घनघोर निराशा की ही खबरें आ रही हों, तब दुनिया के सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स ने कहा है कि अगर सरकार स्वास्थ्य व शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘उत्साही तरीके’ से निवेश करे तो भारत अगले एक दशक में बहुत तेज़ी से आर्थिक विकास कर सकता है। अन्य जानकार भी यही मानते हैं कि बिना मानव पूंजी के देश आगे नहीं बढ़ सकता। फिलहाल तथास्तु में लीक से हटकर एक कंपनी…औरऔर भी