जीवन ही नहीं, निवेश में भी हर साल कोई न कोई सबक देकर जाता है, बशर्ते हम सीखने को तैयार हों। साल 2025 का खास सबक यह है कि माहौल में जब हर तरफ उहापोह व दुविधा छाई हो, तब तिनके बचाते नहीं, सबसे पहले डूब जाते हैं। माना जाता है कि स्मॉल-कैप कंपनियों सबसे ज्यादा रिटर्न देती हैं। लेकिन बीते साल ने यह मिथक धराशाई कर दिया। 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच निफ्टी-50औरऔर भी

किसी ज़माने में शेयर बाज़ार में लोग भावों को भगवान मानते थे। आज भी कुछ लोग मानते हैं। लेकिन भाव के ‘भगवान’ के साथ बाज़ार में कैसा खेल होता है, इसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। आरआरपी सेमिकंडक्टर्स केवल बीएसई में लिस्टेड है। अप्रैल 2024 में इसके शेयर का भाव ₹20 की रेंज में चल रहा था। वहां से बढ़ते-बढ़ते 10 नवंबर 2025 को ₹11,902 तक चला गया। करीब डेढ़ साल में 59,410% का रिटर्न। वो भीऔरऔर भी

खुद अपने दम पर उद्यमी बने देश के 200 शीर्ष लोगों की मिलेनिया-2025 की सूची में ज़ोमैटो प्लेटफॉर्म चला रही कंपनी इटरनल के सीईओ दीपिंदर गोयल भले ही पहले नंबर पर हों, लेकिन दूसरे नंबर पर रहे राधाकृष्ण दामाणी ऐसी शक्सियत हैं जो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से लेकर निवेश व उद्यमिता की शानदार मिसाल हैं। उनके निवेश पोर्टफोलियो का मूल्य दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। 71 साल के हो चुके दामाणी ने स्टॉक-ब्रोकर रहेऔरऔर भी

साल 2025 का आखिरी महीना। इसी महीने के पहले दिन बीएसई सेंसेक्स 86,159.02 और एनएनई निफ्टी 26,325.80 के नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया। उसके बाद से मुनाफावसूली जारी है। फिर भी इस वक्त सेंसेक्स 23.26 और निफ्टी 22.68 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। पी/ई अनुपात ही मूलतः वो पैमाना है जिससे पता चलता है कि कोई स्टॉक या सूचकांक, मतलब बाज़ार महंगा है या नहीं। निफ्टी का पी/ई अनुपात 20 से नीचे रहताऔरऔर भी

देश के 80% परिवार इतना भी कमा नहीं पाते कि कहीं निवेश कर सकें। बाकी 20% में भी बहुतेरे ऐसे हैं जो जमकर कमाने के बाद भी कुछ बचा नहीं पाते। इनके लिए धन हाथ की मैल नहीं, बल्कि पानी की तरह है जो कोई न कोई जरिया खोजकर बहता रहता है। धन लोगों की आदतों, बर्ताव, भावनाओं, चाहतों, विश्वास, लालच, सुरक्षा व स्वभाव के अनुरूप कहीं टिकता तो कहीं फिसलता रहता है। दुनिया में मूल्यवान निवेशऔरऔर भी

लोग अक्सर पूछते रहते हैं कि शेयर बाज़ार कहां जाएगा। इनमें नाते-रिश्तेदार से लेकर निवेश व ट्रेडिंग से जुड़े तमाम लोग शामिल हैं। बाज़ार की अनिश्चितता के बीच निश्चितता खोजना सहज मानवीय वृत्ति या कमजोरी है। हर छोटा-बड़ा धंधेबाज़ इसका फायदा उठाता है। ऋधम देसाई बहुत बड़े मार्केट गुरु हैं। कई किताबें लिख चुके हैं। अखबारों में कॉलम लिखते हैं। भारत में मॉरगन स्टैनले जैसे बहुराष्ट्रीय निवेश बैंक के मुख्य इक्विटी रणनीतिकार हैं। उन्होंने हाल ही मेंऔरऔर भी

कंपनियों में सोच-समझकर किया गया निवेश ही लम्बे समय में फलदायी होता है। इसके लिए उनके बारे में जो भी उपलब्ध डेटा है, उसकी तह में पैठना पड़ता है। अच्छी बात यह है कि पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी के नियमों के अनुसार हर लिस्टेड कंपनी को वित्तीय फैसलों से लेकर कॉरपोरेट गवर्नेंस तक की सारी जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों पर घोषित करनी होती है। यहां तक कि अचानक क्यों कंपनी के शेयर उछल गए, इस पर भीऔरऔर भी

पीनेवालों को पीने का बहाना चाहिए। इसी तरह सौदागरो को शेयर बाज़ार में मुनाफा काटने के ट्रिगर चाहिए। बिहार के चुनावों का हमारे शेयर बाज़ार के कोई लेना-देना नहीं। लेकिन इसमें एनडीए की बम्पर जीत के माहौल में बहुतेरे सौदागर 14 नवंबर को दोपहर होते-होते मुनाफा काटकर निकल गए। कुछ ऑपरेटर आगे का माहौल बनाने के लिए बाज़ार बंद होने से ठीक पहले 3 से 3.10 बजे तक 10 मिनट में ही निफ्टी-50 को 0.70% चढ़ा लेऔरऔर भी

जब कंपनी के शेयर में निवेश करते हैं तो दोहरा रिस्क उठाते हैं। एक उस कंपनी के बिजनेस का रिस्क और दूसरा खुद शेयर बाज़ार का रिस्क। रिस्क कभी बताकर नहीं आते। आप कितनी भी रिसर्च कर लें, मुद्रास्फीति का हिसाब लगा लें, बिजनेस पर हो रहे नीतियों के प्रभाव का आकलन कर लें, उद्योग में होड़ की जांच-परख कर लें, कंपनी के अतीत को तार-तार समझकर भविष्य का आकलन कर लें। लेकिन अचानक कहीं से दुनियाऔरऔर भी

बाज़ार में जरा-सा माहौल बना नहीं कि निफ्टी के चंद महीनों में 30,000 और साल भर में 40,000 तक पहुंचने की भविष्यवाणी आने लगी। टिप्स की बमबारी शुरू हो गई। इन हवाबाज़ियों को नज़रअंदाज करना चाहिए। तेज़ी के बाज़ार में वही स्टॉक्स खरीदें जो मूलभूत रूप से मजबूत होने के बावजूद किन्हीं तात्कालिक वजहों से दब गए हों। इस दौरान ज्यादा ज़रूरी है अपने पोर्टफोलियो की साफ-सफाई। सबसे पहले उन कमज़ोर स्टॉक्स को निकाल दें जो भूल-चूकऔरऔर भी