आजकल तो जिस भी आर्थिक फोरम या उद्योग के सेमिनार में जाओ, वहां एसएमई (लघु व मध्यम उद्योग) का नाम जरूर सुनने को मिल जाता है। यह क्षेत्र पिछली मंदी से बुरी तरह चोट खाने के बाद पटरी पर लौटने की पुरजोर कोशिश में लगा है। कुछ को फाइनेंस समय पर मिल जा रहा है, दूसरों से बढ़ी-चढ़ी ब्याज ली जा रही है तो बाकी तय नहीं कर पा रहे हैं कि नई शुरुआत करें या हथियारऔरऔर भी

विपक्ष ने गदर काट रखा है कि 2008 में 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में भारी घोटाले के कारण ही सरकार को केवल 10,000 करोड रुपए मिल पाए थे। लेकिन दूरसंचार नियामक संस्था, टीआरएआई सुधार में जुट गई है। उसने कहा है कि 2 जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस के नवीकरण का आधार 3 जी के लिए मिले मूल्य (67,719 करोड़) को बनाया जाए और नवीकरण तक हर साल 3 फीसदी की दर से चक्रवृद्धि ब्याज लगाया जाए।औरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वादा किया है कि अगर 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार साबित हुआ तो संबंधित शख्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह वादा तब किया जब उनसे पूछा गया कि वे दूरसंचार मंत्री ए राजा के खिलाफ 2008 में लाइसेंसों की बिक्री में भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री सोमवार को नई यूपीए सरकार के एक साल पूरा करने पर आयोजित संवाददाताऔरऔर भी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एमसीएक्स) पर सोमवार, 24 मई से जस्ता के लघु मिनी कांट्रैक्ट या लघु अनुबंध में वायदा कारोबार शुरू हो गया। एमसीएक्स ने इसके लिए जून व जुलाई के अनुबंध उपलब्ध कराए हैं और आगे समय के अनुसार दूसरे अनुबंध भी लाए जाएंगे। जस्ता के लघु अनुबंध की खासियत यह है कि इसकी लॉट साइज 1 टन की है जबकि एक्सचेंज पर चालू जस्ता के सामान्य अनुबंध का लॉट साइज 5 टनऔरऔर भी

हाल ही में डेरिवेटिव सौदों में फ्रॉड करने के आरोप में अमेरिकी पूंजी बाजार नियामक संस्था, एसईसी की जांच के दायरे में आए निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का नाम तो आपने सुना ही होगा। लेकिन शायद आपको नहीं पता कि दुनिया के चार सबसे तेजी से बढ़ते देशों – ब्राजील, रूस, भारत (इंडिया) और चीन को एक साथ मिलाकर ‘ब्रिक’ का नाम गोल्डमैन सैक्स ने ही 2001 में ईजाद किया था। साल 2000 से 2008 के दौरानऔरऔर भी

विदेशी मुद्रा के असली सौदागर हैं हमारे बैंक और इनके प्रमुख ग्राहक हैं हमारे आयातक-निर्यातक। आयातकों व निर्यातकों को चिंता रहती है कि उनका विदेशी मुद्रा खर्च या आमदनी कहीं विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय मुद्रा में घट-बढ़ न जाए। इसलिए वे बैंकों के पास ऐसे डेरिवेटिव सौदों के लिए जाते हैं ताकि इससे बचा जा सके। ऐसे ज्यादातर सौदे ओटीसी (ओवर द काउंटर) बाजार यानी दो पार्टियों ग्राहक व विक्रेता के बीच आपस मेंऔरऔर भी

रिलायंस समूह अब भी शेयर बाजार का बेताज बादशाह बना हुआ है। इसलिए मुकेश और अनिल अंबानी के बीच सुलझ हो जाने के बाद पूरी उम्मीद है कि सोमवार को बाजार में तेजी का आलम रहेगा। इस बीच आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज जैसी देश की प्रमुख ब्रोकरेज व निवेश बैंकिंग कंपनी ने भी अनुमान जताया है कि इस साल बीएसई सेंसेक्स 19,000 अंक के ऊपर जा सकता है। कंपनी की सीईओ व प्रबंध निदेशक माधबी पुरी बुच का कहनाऔरऔर भी

अमेरिका की प्रमुख दवा कंपनी एबॉट ने भारत की दवा कंपनी पिरामल हेल्थकेयर को 372 करोड़ डॉलर (17,465 करोड़ रुपए) में खरीदने का ऐलान कर दिया है। इस अधिग्रहण से एबॉट भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी बन गई है। अधिग्रहण करार के तहत एबॉट पिरामल हेल्थकेयर को 212 करोड़ डॉलर एकमुश्त देगी और बाकी 160 करोड़ डॉलर 40-40 करोड़ डॉलर की चार सालाना किश्तों में दिए जाएंगे। एबॉट का कहना है कि इस सौदे से उसेऔरऔर भी

अगर देश के आयकर विभाग को ठीक तरह से काम करना है तो उसे तत्काल 30,000 नए कर्मचारियों को भर्ती करने की जरूरत है। यह कहना है वित्त मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी का। इस अधिकारी ने एक समाचार एजेंसी के बातचीत के दौरान कहा कि करदाताओं को दी जानेवाली सेवाओं और कर संग्रह के काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए 22,000 नए कर्मचारी चाहिए, जबकि 8000 जगहें पहले से खाली पड़ी हैं। बता देंऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए ओपन ऑफर की सीमा को न्यूनतम 20 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 25 फीसदी कर सकती है। वह यह फैसला पिछले साल बनाई गई टेकओवर रेगुलेशंस एडवाइजरी कमिटी (टीआरएसी) की सिफारिशों के आधार पर करेगी। साथ ही यह भी संभव है कि ओपन ऑफर लाने की ट्रिगर लिमिट 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी जाए। सूत्रों के मुताबिक सेबी जल्दी ही अपने टेकओवर कोडऔरऔर भी