बिल गेट्स और वॉरेन बफेट इस समय दुनिया के सबसे बड़े दानवीर बने हुए हैं। जनसेवा और दान पर जगह-जगह भाषण देते फिरते हैं। लेकिन उनकी दानवीरता करुणा नहीं, बल्कि मजबूरी का नतीजा है। दोनों अमेरिकी नागरिक हैं और अमेरिकी कानून के मुताबिक मरने के बाद किसी व्यक्ति की संपत्ति या तो सरकार की हो जाती है या उसे उत्तराधिकार के लिए भारी-भरकम टैक्स भरना पड़ता है। इससे बचने के लिए वहां के अधिकांश अमीर अपनी संपत्तिऔरऔर भी

ग्लोबीकरण का शोर ज्यादा, सच्चाई कम है। अपना देश छोड़कर बाहर पढ़ने जानेवाले छात्रों की संख्या मात्र दो फीसदी है। अपनी मातृभूमि से अलग रहनेवाले लोगों की संख्या मात्र तीन फीसदी है। सीमाओं से बाहर व्यापार के लिए जानेवाले चावल की मात्रा केवल 7 फीसदी है। एस एंड पी 500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के निदेशकों में विदेशियों की संख्या महज 7 फीसदी है। दुनिया के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का केवल 20 फीसदी हिस्सा निर्यात सेऔरऔर भी

रामदेव का अनशन तो नौ दिन में निपट गया। लेकिन उत्तराखंड में लंबे अनशनों की लंबी पंरपरा है। सबसे लंबे अनशन का रिकॉर्ड 84 दिनों का है। 1940 के दशक में टिहरी में लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले गांधीवादी दिवंगत श्रीदेव सुमन ने अपनी कैद के दौरान 84 दिनों तक अनशन रखा था। अनशन के 84वें दिन उनका निधन हो गया था। चिपको आंदोलन के नेता सुंदर लाल बहुगुणा ने 74 दिनों का अनशन रखा था।औरऔर भी

नहीं पता कि मकबूल फिदा हुसैन झूठ बोलते थे या बुढ़ापे में उनकी याददाश्त कमजोर पड़ गई थी। दिसबंर 2006 में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि नंगे पांव रहना उन्होंने 1964 में मशहूर कवि गजानन माधव मुक्तिबोध की अंत्येष्टि के दिन से शुरू किया था। दिल्ली में अंतिम दर्शन के दौरान उन्हें यह जानकर सदमा लगा कि तब तक इतने महान कवि की एक भी रचना नहीं छपी थी। इस दुख में उन्होंने अपने जूतेऔरऔर भी

पंजाब सरकार ने राज्य में समग्र ‘सेवा का अधिकार अधिनियम’ अपना लिया है। यह कानून नागरिकों को समय पर सेवा मुहैया कराना सुनिश्चित करेगा और किसी भी देरी के लिए 500 से 5000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। जल्दी ही इस कानून को अधिसूचित कर दिया जाएगा और अगले जुलाई माह से यह लागू हो जाएगा। इसी के साथ पंजाब निर्धारित अवधि (1 से 60 दिन) में 67 सेवाएं उपलब्ध करानेवाला देश का पहला राज्यऔरऔर भी

आमतौर पर जीवन बीमा का फॉर्म हम खुद नहीं भरते। एजेंट निशान बनाकर देता है कि यहां-यहां आपको दस्तखत करने हैं और हम कर देते हैं। हम शर्तों को तो क्या, फॉर्म तक को ठीक से पढ़ने की जहमत नहीं उठाते। लेकिन यह कानूनन गलत है। कानून के मुताबिक जीवन बीमा का फॉर्म बीमाधारक की अपनी हैंडराइटिंग में भरा जाना जरूरी है। नहीं तो बीमा कंपनी इसी बात को आधार बनाकर उसका क्लेम खारिज कर सकती है।औरऔर भी

शेयर बाजार की महत्ता हम लोग नहीं समझते। लेकिन पिछले आठ सालों में शेयर बाजार में सौदों की मात्रा में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2002-03 में यहां साल भर में हुई कुल ट्रेडिंग देश के सकल घेरलू उत्पाद (जीडीपी) का 57.28% थी। लेकिन 2010-11 में यह आंकड़ा 517.30% का हो गया। यानी, हमारी अर्थव्यवस्था का जो आकार है, उसकी पांच गुना से ज्यादा ट्रेडिंग शेयर बाजार में होने लगी है। वैसे इसमें से 445.91% ट्रेडिंग ऑप्शंस वऔरऔर भी

बिहार पूरे देश का इकलौता राज्य है जहां सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। वहां कोई भी कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान से 155311 पर फोन करके आवेदन लिखवा सकता है जिसे संबंधित कार्यालय के पीआईओ को डाक/ई-मेल द्वारा भेज दिया जाता है। इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए अब आम आदमी को ऑनलाइन आरटीआई आवेदन दर्ज कराने की सुविधा दे दी गई है। इस तरह की सुविधा न तो महाराष्ट्रऔरऔर भी

रक्षा मंत्रालय के पास देश भर में 17 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन है। इस लिहाज से वह देश का सबसे बड़ा भूस्वामी है। उसकी यह जमीन 62 छावनि‍यों और डिफेंस एस्टेट्स में फैली है। जमीन की देखभाल डीजीडीई (डायरेक्टर जनरल ऑफ डिफेंस एस्टेट्स) के जिम्मे है। रक्षा मंत्रालय ने इस जमीन के ऑडिट के लिए विशेष कदम उठाए हैं। हाल के कई घोटालो के मद्देनजर रक्षा भूखंडों के लि‍ए अनापत्‍ति‍ प्रमाणपत्र हासिल करने की प्रक्रि‍या कोऔरऔर भी

वैसे तो देश के खजाने और मौद्रिक नीति के प्रबंधन का कोई वास्ता किसी आस्था नहीं है। लेकिन रिजर्व बैंक में लगता है कि शीर्ष पर कहीं कोई हनुमान-भक्त बैठा है क्योंकि उसकी सालाना मौद्रिक नीति और हर तिमाही समीक्षा मंगलवार को ही आती रही है। 20 अप्रैल को 2010-11 की सालाना मौद्रिक नीति आई। 27 जुलाई 2010 को पहली समीक्षा, 2 नवंबर 2010 को दूसरी समीक्षा और 25 जनवरी 2011 को तीसरी समीक्षा हुई। इसमें सेऔरऔर भी