डूबे अर्थव्यवस्था, उछले शेयर बाज़ार!
भारतीय अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है। पहली तिमाही में जीडीपी के 23.9% घटने पर भी विदेशी निवेशक संस्थाओं ने हमारे शेयर बाज़ार में निवेश ज्यादा नहीं घटाया। बीते महीने उन्होंने कैश सेगमेंट में करीब 15,750 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। अगर ऋण बाज़ार को भी जोड़ दें तो अगस्त में उनका कुल निवेश 6 अरब डॉलर (≈ 45,000 करोड़ रुपए) का रहा है। वे एशिया में चीन व भारत में निवेश बढ़ा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
विदेशी संस्थाएं कमाएं, देशी रक्षात्मक
अपने शेयर बाज़ार के बारे में खास जानने की बात है कि यहां देशी निवेशक संस्थाएं हमेशा रक्षात्मक रहती हैं। वे कभी-कभार ही आक्रामक होती हैं। दूसरी तरफ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक या विदेशी निवेशक संस्थाएं हमेशा ही आक्रामक रहती हैं। ये एफआईआई आज हमारे बाज़ार की दशा-दिशा तय करने के सबसे अहम कारक हैं। उनके डॉलर आने से बाज़ार चढ़ता है। इससे रुपया मजबूत होता है तो वे ज्यादा डॉलर कमा लेते हैं। अब बुद्ध की बुद्धि…औरऔर भी
बाज़ार में कौन सुनार, कौन है लोहार!
शेयर बाज़ार में खरीदनेवाले कौन हैं, इससे भी बहुत फर्क पड़ता है। रिटेल की खरीद समुंदर में एक लोटा या बाल्टी पानी के बराबर होती है। सौ सुनार की, एक लोहार की। बाज़ार में बल्क/ब्लॉक खरीद तो जगजाहिर हो जाती है और वह खटाक से एक-दो दिन में निपट जाती है। लेकिन इनसे अलग प्रोफेशनल व सस्थागत निवेशकों की खरीद होती है जो खास दिशा पकड़कर बराबर चलती है। इसकी परख ज़रूरी है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
ज्यादा मुनाफे के मौके सूंघते उस्ताद
यूं तो हर दिन बाज़ार में खरीदे और बेचे गए शेयरों की संख्या बराबर होती है। लेकिन खरीदने और बेचनवालों की संख्या भिन्न हो सकती है। इसमें भी अगर खरीदने का जोर ज्यादा तो शेयर के भाव बढ़ते हैं और बेचने का ज़ोर ज्यादा तो शेयर गिरते हैं। खरीदनेवालों की ज़मात किस दिन, किस ओर मुड़ जाए, पहले से इसका कोई पता नहीं रहता। वे ज्यादा मुनाफे के मौके सूंघते फिरते रहते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
धोखे व फ्रॉड के बीच शांत निवेश
शेयर बाज़ार में धोखे व फ्रॉड का खेल चलता रहता है। इसका गुब्बारा फुलाने के पीछे किसी न किसी ताकतवर खिलाड़ी/संस्था का हाथ रहता है। ऐसे कई किस्से वॉल स्ट्रीट से लेकर दलाल स्ट्रीट तक बिखरे पड़े हैं। इसलिए हमारे लिए सबसे अच्छी रणनीति यह है कि बाज़ार के उन्माद का शिकार होने के बजाय शांत भाव से अच्छा धंधा कर रही संभावनामय कंपनियों में 5-10 साल के लिए निवेश करे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी






