अगर आम लोग शेयर बाज़ार में आना ही चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करतब करना चाहिए जिससे उन्हें थोड़ी बहुत बंधी-बंधाई रकम मिल जाए। मुझे पक्का नहीं पता, लेकिन शायद इंट्रा-डे ट्रेडर कुछ ऐसा की काम करते हैं। उन्हें दिन भर में कुछ घंटे शेयरों के भावों के उतार-चढ़ाव पर खेलना होता है। यकीनन इसमें काफी रिस्क है। लेकिन वे स्टॉक्स के सही चुनाव और उपयुक्त चार्ट अपनाकर रिस्क न्यूनतम कर सकते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश उनके लिए, जिनके पास रोजमर्रा व आकस्मिक ज़रूरतों के इंतज़ाम के बाद अतिरिक्त धन बच जाता है, वहीं ट्रेडिंग उनके लिए है जिनके पास कहीं ज्यादा इफरात धन है। आज जब अपने यहां नौकरी-धंधों में मंदी छाई है तब लोग घबराहट व लालच में शेयर बाज़ार की ओर भाग रहे हैं। यह मनःस्थिति उन्हें आसानी से औरों का शिकार बना सकती हैं और उनका बचा-खुचा सुरक्षा-कवच टूट सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

ऊपर-ऊपर दिखते हैं शेयरों के भाव। लेकिन उनके पीछे होती है अदृश्य हाथों की सम्मिलित व सामूहिक ताकत। भावों के पैटर्न से हम शेयरों का स्वभाव जान सकते हैं। लेकिन शेयरों का स्वभाव उन लोगों से बनता है जो अपने स्वभाव से उन कंपनियों व स्टॉक्स की तरफ खिंचे चले जाते हैं और नियमित रूप से उन्हीं में ट्रेड करते हैं। हमेशा याद रखें कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग धनवानों का खेल है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

लालच व डर की भावनाएं ही शेयर बाज़ार को चलाती हैं। मार्च में कोरोना का प्रकोप बढ़ा। देश में लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हुआ। बाज़ार इतना गिरा कि बढ़ने का लालच बढ़ गया। इसमें फंसकर लॉकडाउन के दौरान 12 लाख से ज्यादा नए निवेशकों ने डिमैट खाते खुलवा डाले। फिर, डर बढ़ने लगा तो जून में इक्विटी म्यूचुअल फंडों में आया शुद्ध निवेश मई की अपेक्षा 95% से ज्यादा घट गया। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी