कोई नीति नहीं, बस अनीति व हवाबाज़ी
भारत के खिलाफ टैरिफ डोनाल्ड ट्रम्प ने लगाया है। लेकिन अग्निपरीक्षा 11 साल से देश की सरकार चला रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की हो रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या सचमुच मोदी सरकार की कोई आर्थिक नीति है भी या सब कुछ हवाबाज़ी और जुमला है। नहीं तो ऐसा कैसे होता कि भारत की जो कृषि पूरी तरह राम-भरोसे है, उसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक पांचऔरऔर भी
वाह रे स्वदेशी! खाद्य तेल तक विदेश से
भारत के खिलाफ 1971 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि पाकिस्तान को केंद्र में रखकर चीन और अमेरिका एक धुरी पर आ गए हैं, जबकि भारत को रूस के साथ अपने रिश्तों को बचाना पड़ रहा है। यह तीन दशकों से चली आ रही भारत की उस विदेश नीति की घनघोर पराजय है जिसमें पाकिस्तान व चीन के गठजोड़ के खिलाफ अमेरिका को सायास साथ रखा गया था। लेकिन इस हकीकत को समझने केऔरऔर भी
गलत नीतियों से दो पाटों में फंसा भारत!
अपनी अंतर्निहित शक्ति और संभावनाओं की बदौलत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार की नीतियों के चलते इस समय दो पाटों के बीच फंसती नज़र आ रही है। सपना है कि दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत साल भर में चौथी और तीन साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मगर दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ही इस विकासयात्रा में फच्चर फंसा दिया है। सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी
लाख से करोड़ करने का बूता और कहां!
मुबई में किसी ने साल 2005 में ₹30 लाख का फ्लैट खरीदा होता तो वो दस साल में एक करोड़ और अब तक बीस साल में दो करोड़ से ऊपर का हो गया होगा। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में कोई ₹35,000 प्रति माह की एसआईपी करे तो 15% सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न के हिसाब से दस साल में उसका धन एक करोड़ रुपए हो जाएगा। हालांकि इस दौरान उसका कुल सीधा-सीधा निवेश ₹42 लाख का होगा। लेकिनऔरऔर भी






