शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग विशुद्ध रूप से कयासबाज़ी या सट्टेबाज़ी का खेल है। इसका कोई वास्ता कंपनियों के फंडामेंटल्स या बिजनेस के हाल-चाल से नहीं होता। अर्थव्यवस्था और आर्थिक नीतियों से भी इसका कोई सीधा रिश्ता नहीं। ट्रेडिंग में सबसे अहम है कि शेयर के भाव अभी क्या हैं और आगे कहां तक जा सकते हैं। फर्क समझें कि शेयरों में दीर्घकालिक निवेश बैक एफडी या प्रॉपर्टी में धन लगाने जैसा काम है, जबकि ट्रेडिंग विशुद्ध बिजनेसऔरऔर भी

जो शेयर बाज़ार का स्वभाव समझते हैं, वे जानते हैं कि यह उतार-चढ़ाव या मंदी और तेज़ी के चक्र में चलता है। बाज़ार गिरता है तो वे परेशान नहीं होते और बाज़ार उठता है तो वे हैरान नहीं होते। पिछले दो-ढाई दशक के अनुभव से एक बात बहुत साफ हो जाती है कि जिन्होंने भी अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स वाजिब भाव पर खरीदे हॆ, उन्होंने लम्बी अवधि या पांच-दस साल में जमकर मुनाफा कमाया है। अभी कीऔरऔर भी