अस्सी साल के हो चुके लैरी विलियम्स बार-बार कहते आए हैं कि वे आज जो कुछ भी हैं, वो केवल और केवल वित्तीय बाज़ार में ट्रेडिंग की बदौलत। उनका यह भी भरोसा है कि जो कोई भी दिल से ट्रेडिंग सीखना चाहता है, उसे ट्रेडिंग सिखाई जा सकती है। भारत में भी ट्रेडिंग सिखाने के कई नामी-गिरामी संस्थान और व्यक्ति हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि उनकी मंशा व मूल मकसद आम लोगों को ट्रेडिंग सिखाना नहीं, बल्कि उनकी सीखने की इच्छा का दोहन करना है, भोले-भाले लोगों का शिकार करना है। इसलिए भारत में हमें एकलव्य बनकर ही सीखना होगा। लेकिन एकलव्य भी ऐसा जो किसी द्रोणाचार्य की मूर्ति बनाकर नहीं, बल्कि अपने ही दम पर सीखता है। इसकी शुरुआत के लिए दीपावली से बेहतर शुभ मुहूर्त क्या हो सकता है? अब शुक्रवार का अभ्यास…
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