बाज़ार में मूल्य समय के साथ बाद में घट-बढ़ सकते हैं। लेकिन एक बार बाज़ार के किसी मूल्य पर समय का ठप्पा लग गया तो उसे बाद की किसी तारीख में संशोधित करके घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। मान लीजिए कि आपने जून 2025 में एक किलो घी 500 रुपए में खरीदा। जून 2026 में उसी घी के दाम 550 रुपए हो गए तो 10% की बढ़ोतरी हो गई। ऐसा हो नहीं सकता कि घी का जो बाज़ार मूल्य 500 रुपए प्रति किलो था, उसे आज आप जबरन घटाकर 485 रुपए बता दें और कह दें कि पिछले साल के मुकाबले बाज़ार मूल्य में बढ़ोतरी 10% नहीं, 13.40% हुई है। लेकिन मोदी सरकार के अर्थशास्त्री भारतीय अवाम को यही घुट्टी पिलाने में लगे हैं। उनका कहना है कि जीडीपी की पुरानी सीरीज़ में 2025-26 की पहली तिमाही में बाज़ार मूल्य पर देश का जो जीडीपी था, वो असल में ₹86.05 लाख करोड़ नहीं, बल्कि ₹80 लाख करोड़ था। ऐसा कैसे हो सकता है कि पिछले साल का बाज़ार मूल्य आप टाइम-मशीन पर पीछे जाकर बदल दें? आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने पर रीयल जीडीपी और रीयल विकास दर ज़रूर बदल जाएगी। लेकिन कल के बाज़ार मूल्य को कोई आज कैसे बदल सकता है? मगर, मोदी सरकार 2022-23 से ही नॉमिनल या बाज़ार मूल्य पर पहले निकाले गए जीडीपी को बाद में घटाती रही है। आखिर क्यों? अब मंगलवार की दृष्टि…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
