बड़ों का आना-जाना, छोटों का मोहभंग!

अपने शेयर बाज़ार में संस्थागत निवेशकों से लेकर व्यक्तिगत निवेशकों में बेचैनी छाई हुई है। इस साल 2026 में जनवरी से अप्रैल तक के चार महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 1.92 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। यह पूरे कैलेंडर वर्ष 2025 में उनकी कुल ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी ज्यादा है। भारतीय कंपनियों में एफपीआई की शेयरधारिता घटकर अभी 16.7% पर आ गई है। यह 2010 के बाद पिछले 16 सालों का न्यूनतम स्तर है। विदेशी निवेशकों की कुछ हद तक भरपाई घरेलू निवेशक संस्थाओं (डीआईआई) ने की है जिन्होंने इस साल के पहले चार महीनों में ₹1.71 लाख करोड़ की शुद्ध खरीद की है। म्यूचुअल फंडों की एसआईपी में औसतन हर महीने ₹30,000 करोड़ आने का सिलसिला जारी है। मार्च में घरेलू म्यूचुअल फंडों ने शेयर बाज़ार में करीब ₹1.05 लाख करोड़ की रिकॉर्ड खरीद की। लेकिन छह साल से शेयर बाज़ार में सीधे ₹4.59 लाख करोड़ डालनेवाले व्यक्तिगत निवेशकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹5803 करोड़ निकाले हैं। आईपीओ को मिला दें कि इनका कुल निवेश ₹36,805 करोड़ रहा है, जबकि पिछले साल 2024-25 में यह ₹1.59 लाख करोड़ रहा था। अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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