ताजा खबर है कि भारतीय कंपनियां अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का पूंजी निवेश करने जा रही है। असल में देश में पूंजी आने के बजाय इसी तरह लगातार बाहर जा रही है। हमारा शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 2024-25 में मात्र 35.3 करोड़ डॉलर रहा है, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में यह 1010 करोड़ डॉलर रहा था। साल भर में 96.5% की भारी कमी। इधर दिसंबर 2025 तक लगातार चार महीने शुद्ध एफडीआई ऋणात्मक रहा है। एक तरफ घटता विदेशी निवेश, दूसरी तरफ विदेश में भारतीय कंपनियों का बढ़ता निवेश। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉरपोरेट क्षेत्र को बार-बार उलाहना दिए जा रही हैं कि तुम देश में निवेश क्यों नहीं कर रहे। ऊपर से देश को आयात पर पहले से कहीं ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। हमारा वस्तु निर्यात 2025-25 में मात्र 0.93% बढ़ा है। इसके चलते हमारा चालू खाते का घाटा बढ़कर जीडीपी का 1.3% हो गया है। वहीं, देश से विदेशी निवेशक व पूंजी भाग रही है। एनआरआई कम धन देश में भेज रहे हैं तो पूंजी खाता भी घाटे में चल रहा है। यह 2013 जैसी स्थिति है। रिजर्व बैंक के मुताबिक हमारी विदेशी मुद्रा आस्तियां 24 अप्रैल 2026 को 554.62 अरब डॉलर है। यह साल भर में 26.04 करोड़ डॉलर घट गई। चालू खाते और पूंजी खाते, दोनों का घाटा रुपए पर भारी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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