अमारा राजा बैटरीज में इधर एक हलचल शुरू हुई है। यह एक्साइड के बाद देश के बैटरी बाजार की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। अच्छे प्रबंधन और रणनीति वाली कंपनी है। शेयर न बहुत ऊपर है, न बहुत नीचे। ऐसे में इसे पकड़ लेने में कोई हर्ज नहीं है। कल अमारा राजा बैटरीज (बीएसई – 500008, एनएसई – AMARAJABAT) के शेयरों का वोल्यूम बीएसई में अचानक पिछले हफ्ते के औसत 74 हजार से बढ़कर 5.62 लाख पर पहुंच गया और नोट करने की बात यह है कि इसमें से 98.76 फीसदी यानी तकरीबन सारे के सारे शेयर डिलीवरी के लिए थे। इसमें कोई ब्लॉक या बल्क डील भी नहीं हुई दिख रही है। एनएसई में भी कल इसके 4.49 लाख शेयरों में सौदे हुए जिसमें से 95.5 फीसदी शेयर डिलीवरी के लिए थे।
जाहिर है, इसमें सटोरिया हरकत के बजाय सच्ची खरीद हो रही है। यह कल बीएसई में मामूली बढ़त के साथ 187 रुपए और एनएसई में मामूली गिरावट के साथ 185 रुपए पर बंद हुआ है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 228.05 (12 अक्टूबर 2010) और न्यूनतम स्तर 139.65 रुपए (28 अप्रैल 2010) रहा है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीनों का ईपीएस (प्रति शेयर शुद्ध लाभ) 16.85 रुपए है और उसका शेयर 11.05 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। यह आकर्षक इसलिए भी लगता है कि बैटरी उद्योग की इसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी एक्साइड इंडस्ट्रीज का पी/ई अनुपात 20.24 चल रहा है। अमारा राजा की प्रति शेयर बुक वैल्यू 71.54 रुपए है, जबकि एक्साइड इंडस्ट्रीज की 30.21 रुपए। अमारा राजा का शेयर बुक वैल्यू से 2.61 गुना तो एक्साइड का शेयर बुक वैल्यू से 5.07 गुना भाव पर ट्रेड हो रहा है।
खास बात यह है कि अमारा राजा बैटरीज बड़ी ही कुशलता से आगे बढ़ रही है। उसका ब्रांड अमैरॉन बाजार में एक्साइड से कंधा रगड़ता चल रहा है। कंपनी ऑटोमोटिव के साथ इंडस्ट्रियल सेगमेंट के लिए भी एक से एक बैटरियां बनाती है। उसने दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोटिव बैटरी निर्माता अमेरिकी कंपनी जॉनसन कंट्रोल्स के साथ हाथ मिला रखा है। मारुति, होंडा, ह्युंडई, टाटा मोटर्स व अशोक लेलैंड समेत देश की लगभग सभी ऑटो कंपनियों की वह ओईएम (ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर) सप्लायर है। वह अपनी बैटरियां दक्षिण अफ्रीका को भी निर्यात करती है।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 1470.16 करोड़ रुपए की आय पर 167.03 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। इस साल सितंबर की तिमाही में उसकी आय 394.04 करोड़ और शुद्ध लाभ 31.60 करोड़ रुपए रहा है। कंपनी की इक्विटी 17.08 करोड़ रुपए है जो दो रुपए अंकित मूल्य के शेयरों में विभाजित है। इसका 52.06 फीसदी हिस्सा प्रवर्तकों के पास है जिसमें में 26 फीसदी अमेरिकी कंपनी जॉनसन कंट्रोल्स का है। एफआईआई के पास इसके 3.26 फीसदी और डीआईआई के पास 17.78 फीसदी शेयर हैं। कंपनी का उत्पादन संयंत्र तिरुपति (आंध्र प्रदेश) में है। जयदेव गल्ला कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं।
