मैन्यूफैक्चरिंग के बिना सेवा क्षेत्र हवाई!

दुनिया के आर्थिक इतिहास में आज तक विकासशील देश से विकसित देश बनने तक की यात्रा हमेशा मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र पर सवार होकर ही पूरी हुई है। ब्रिटेन, अमेरिका, जापान व दक्षिण कोरिया से लेकर ताइवान और चीन तक इसी राह से गुजरे हैं। हालाकि चीन अभी तक विकसित देश नहीं बना है। लेकिन अपनी मैन्यूफैक्चरिंग के दम पर आज वो दुनिया की फैक्टरी बन चुका है। भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है तो वो मैन्यूफैक्चरिंग की उपेक्षा नहीं कर सकता। हमने भले ही आईटी सेवाओं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी धाक जमा ली हो। लेकिन बिना मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाउस बने न तो हम विकसित देश बन सकते हैं और न ही देश की बम-बम करती युवा आबादी को कायदे का रोज़गार दे सकते हैं। तब तक 46% श्रम-शक्ति को सोखकर चल रही कृषि को भी मुक्ति नहीं मिल सकती। इसलिए बजट में मैन्यूफैक्चरिंग को बाईपास कर अगर कहा गया है कि विकसित भारत का मुख्य वाहक सेवा क्षेत्र होगा और इसके दम पर भारत 2047 तक सेवाओं में 10% हिस्से के साथ विश्व का नेता होगा तो यह हवा-हवाई बात लगती है। मैन्यूफैक्चरिंग के आधार के बिना सेवा क्षेत्र कैसे बढ़ेगा? आज तथास्तु में पेश है मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र ही एक कंपनी…

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