अर्थव्यवस्था की हालत डांवाडोल हो, सरकार के दावों पर यकीन न रह गया हो, विदेशी निवेशक भागे जा रहे हों, तमाम कंपनियों का धंधा मंदा चल रहा हो, शेयर बाज़ार गिरा जा रहा हो, तब ऐसा क्या पैमाना है जिसे निवेश लायक कंपनियां छांटने का आधार बनाया जा सकता है? यह है नियोजित पूंजी पर रिटर्न या RoCE, जिसे कंपनी के ब्याज व टैक्स से पहले के लाभ (EBIT) को नियोजित पूंजी से भाग देकर निकाला जाता है। नियोजित पूंजी का मतलब है कंपनी की इक्विटी + उसके लंबे समय के ऋण। इसकी गणना कुल आस्तियों में से चालू देयताएं घटाकर की जाती है। वैसे तो यह रिटर्न अलग-अलग उद्योगों के लिए अलग-अलग होता है। लेकिन मोटेतौर पर माना जाता है कि अगर किसी कंपनी का नियोजित पूंजी पर रिटर्न 20% से ज्यादा है तो वह अच्छा काम कर रही है। इस रिटर्न का अधिक होना प्रतिस्पर्धा में कंपनी की बेहतर स्थिति और प्रबंधन की दक्षता भी दिखता है। अमूमन उपभोक्ता वस्तुओं, आईटी और फार्मा जैसी कंपनियों का यह रिटर्न ज्यादा होता है। ऐसी कंपनियों का धंधा अपनी रफ्तार से चलता है और इनका समग्र आर्थिक हालात से तगड़ा रिश्ता नहीं होता। आज तथास्तु में ज्यादा रिटर्न कमा रही ऑटो पार्ट उद्योग की एक कंपनी…
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