बड़ी मुश्किल है कंपनी प्रबंधन की थाह!

कंपनियों में सोच-समझकर किया गया निवेश ही लम्बे समय में फलदायी होता है। इसके लिए उनके बारे में जो भी उपलब्ध डेटा है, उसकी तह में पैठना पड़ता है। अच्छी बात यह है कि पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी के नियमों के अनुसार हर लिस्टेड कंपनी को वित्तीय फैसलों से लेकर कॉरपोरेट गवर्नेंस तक की सारी जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों पर घोषित करनी होती है। यहां तक कि अचानक क्यों कंपनी के शेयर उछल गए, इस पर भी सफाई देनी पड़ती है। उन्हें तिमाही व सालाना नतीजे पेश करने होते हैं। कंपनियां प्रजेंटेशन भी प्रस्तुत करती हैं। कंपनियों का सारा फाइनेंशियल डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है तो हम उसकी लाभप्रदता समेत बिजनेस का हर पहलू जान सकते हैं। लेकिन कंपनी की सेहत जुड़ा एक अहम पहलू है जिससे जुड़ी कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं होती। यह है प्रबंधन की क्वालिटी व दक्षता। हम इसका अनुमान भर लगा सकते हैं। कंपनी में प्रवर्तकों की ज्यादा हिस्सेदारी भी विश्वास नहीं जगाती। लेकिन कुछ कंपनियों का प्रबधन बंद राहें तक खोलने का दम-खम रखता है। इसका प्रमाण उनका लम्बा ट्रैक-रिकॉर्ड पेश कर देता है जो विश्वास जगाने के लिए पर्याप्त होता है। तथास्तु में पेश है आज ऐसी ही एक कंपनी…

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