कितनी विडम्बना है कि इस सरकार को अपने और अपनों के अलावा किसी का स्वार्थ नहीं दिखता। इन्हीं निजी स्वार्थों को वो देश का हित बनाकर प्रोजेक्ट कर रही है। इसका एक छोटा-सा प्रमाण है मुंबई का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज। इसे फिक्की और सीआईआई जैसे देश के शीर्ष उद्योग संगठनों ने भारत सरकार के सूचना व प्रसारण मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर प्रमोट किया है। इसे देश में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग व कॉमिक्स (एवीजीसी) का नोडल संस्थान बताया गया है। लेकिन यह किसी खैरात नहीं, बल्कि बाकायदा मोटी फीस पर चलाया जा रहा संस्थान है। इसमें प्रति व्यक्ति इनरोलमेंट की न्यूनतम फीस ₹10,000 है। ऊपर से इसमें शिक्षा के नाम पर फिक्की व सीआईआई से जुड़ी सैकड़ों कंपनियों के सीएसआर का धन हर साल आता होगा। इसके निदेशक बोर्ड और गवर्निंग काउंसिल में निजी क्षेत्र के बड़े-बड़े दिग्गज शामिल हैं। इन्हीं में से एक नाम गौरव बनर्जी का है जो आजतक से लेकर स्टार न्यूज़ व स्टार प्लस तक के सफर के बाद अभी सोनी पिक्चर्स के प्रबंध निदेशक हैं। यह संस्थान सरकार के किसी सहयोग का मोहताज़ नहीं। फिर भी बजट में साल 2030 तक देश में 20 लाख प्रोफेशनल्स की मांग के नाम पर इसे 15000 सेंकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेज़ों का धंधा पकड़ा दिया गया है। अब बुधवार की बुद्धि…
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