भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। पिछले दस सालों में देश का जीडीपी मार्च 2016 के ₹135.76 लाख करोड़ से 2.63 गुना होकर मार्च 2026 तक ₹357.14 करोड़ पर पहुंचने जा रहा है। जाहिर है कि देश की धन-दौलत भी बढ़ी है। लेकिन यह धन-दौलत जा कहां रही है? किसानों की आय तो दोगुना हुई नहीं! इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस सालों में मध्यम वर्ग की औसत कमाई ₹10.23 लाख से मात्र 4.5% बढ़कर ₹10.69 लाख पर पहुंची है। यह भी चौंकानेवाला तथ्य है कि रत्ती-रत्ती, पाई-पाई और चप्पे-चप्पे पर पर टैक्स लगा देने के बावजूद 2014-15 से 2024-25 के बीच शुद्ध कर राजस्व जीडीपी के 7.2% से 7.9% पर ही पहुंचा है। टैक्स पूरा नहीं पड़ रहा तो सरकार अपनी अय्याशी के लिए अंदर-बाहर से जमकर ऋण ले रही है। नतीजतन, देश खोखला होता जा रहा है। आखिर, जीडीपी के साथ देश की बढ़ी हुई धन-दौलत जा कहा रही है? 2014 से 2025 के बीच गौतम अडाणी की दौलत ₹17,000 करोड़ से 50 गुना होकर ₹8.5 लाख करोड़ और मुकेश अंबानी की दौलक ₹1.4 लाख करोड़ से ₹10 लाख करोड़ पर जा पहुंची है। इसी दौरान भारत भुखमरी सूचकांक में दुनिया के 123 देशों में 55वें स्थान से 102वें स्थान तक गिर गया। साफ है कि बढ़ता जीडीपी कहां जा रहा है और कौन मालामाल बनता जा रहा है। अब बुधवार की बुद्धि…
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