ट्रम्प के 50% टैरिफ लगाने का हल्ला मचाया जा रहा है। 500% टैरिफ तक की बात कही जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि भारत के निर्यात में टैरिफ से बड़ी समस्याएं आंतरिक हैं। 25 नवंबर 2025 को बोर्ड ऑफ ट्रेड की बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए निर्यातकों से खुद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से शिकायत की कि उन्हें कच्चा माल वैश्विक कीमतों से 15-20% महंगा मिलता है। बहुत सारे राज्यों में माल की टेस्टिंग की सुविधा नहीं है। शिपमेंट की विकट समस्या है। इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए पिछले साल के बजट में एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन की घोषणा की गई थी। लेकिन इसकी शुरुआत ही 31 दिसंबर 2025 से की गई। अमेरिका ने भारत से आयात होनेवाली कई वस्तुओं पर एंटी-डपिंग ड्यूटी लगा रखी है, जिसे खत्म करवाने की कोई कोशिश भारत सरकार ने नहीं की है। नौकरशाही का आलम यह है कि भारतीय मानक ब्यूरो निर्यातकों को जबरन अटका देता है। देश का वस्तु निर्यात 2013-14 से 2023-24 तक के दस साल में मात्र 3.36% सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 314 अरब डॉलर से 437.07 अरब डॉलर पर पहुंचा। अगले साल 2024-45 में तो यह केवल 0.08% बढ़कर 437.42 अरब डॉलर पर पहुंच सका। इस दौरान तो अमेरिका या किसी दूसरे देश का कोई भारी-भरकम टैरिफ नहीं था। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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