जिस पर वश, उसे संभालें, बाकी रिस्क!

शेयर बाज़ार को कितने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कारक किस हद तक प्रभावित कर रहे हैं, क्या इसे हम-आप तो छोडिए, कोई विशेषज्ञ भी सही-सही सटीक रूप से जान सकता है? आप कहेंगे कि भले ही विशेषज्ञ न जान सके, लेकिन आज लार्ज लैंग्वेज़ मॉडल (एलएलएम) पर काम कर रहे एआई टूल्स तो ज़रूर जानकर हमें बता सकते हैं। मगर, एआई टूल्स भी तो जो पहले से उपलब्ध है, उसे ही ताश के पत्तों की तरह शफल करके पेश करते हैं। इसलिए उनकी पेशकश को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। हम जिन कंपनी में निवेश करना चाहते हैं, उसके अतीत व वर्तमान को जान सकते हैं। लेकिन भविष्य को नहीं, जबकि शेयर के भाव तो भविष्य के अनुमान पर ही चलते हैं। इसीलिए जब हम शेयरों में निवेश करते हैं तो हम रिस्क ले रहे हैं, अपना धन जोखिम में डाल रहे हैं। इस जोखिम को नांथने का तरीका यह है कि जो हमारे वश में नहीं है, उसे छोड़कर जो हमारे वश में है, उसे भलीभांति जानकर चलें। यह है हमारा अपना स्वभाव, हमें कितना निवेश करना है, इस निवेश का लक्ष्य है, हम कितना रिस्क ले सकते हैं, कहीं हम लालच या किसी की टिप्स में फंसकर गलत दांव तो नहीं लगा रहे हैं, आदि-इत्यादि। अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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