जिसे हम देख-समझ नहीं पाते, उसे अज्ञात कह देते हैं। लेकिन समूची सृष्टि में कुछ भी अकारण नहीं है। हां, यह जरूर है कि हाथी अपनी पीठ नहीं देख सकता। उसी तरह हमारी भी निजी सीमाएं हैं।और भीऔर भी

चींटी अगर घड़े पर भी चले तो उसे लगता है कि वह सीधी रेखा में चल रही है। हमारे साथ भी यही होता है। लेकिन इस सृष्टि में सब कुछ वक्र है। विशाल वक्र का छोटा हिस्सा हमें सीधा दिखता है, पर होता नहीं।और भीऔर भी

वाइकिंग मिथक के अनुसार ग्रहण तब लगता है जब स्कोल और हैती नाम के दो भेड़िए सूरज या चंद्रमा को जकड़ लेते हैं। इसीलिए जब भी ग्रहण पड़ता था तो वाइकिंग लोग खूब शोर मचाते और ढोल बजाते थे ताकि वे भेड़िए डर कर आसमान से भाग जाएं। कुछ समय बाद लोगों ने महसूस किया कि उनकी ढोल-तमाशे का का ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ता। ग्रहण तो अपने-आप ही खत्म हो जाता है। प्रकृति के तौर-तरीकोंऔरऔर भी

समूची सृष्टि में हर चीज की दो गतियां होती हैं। एक अपनी धुरी पर और एक बाहर। अलग-अलग, लेकिन परस्पर जुड़ी। जो इन दोनों गतियों को साध लेता है, वही सफल साधक और सांसारिक है।और भीऔर भी