न तो दुनिया और न ही शेयर बाज़ार हमारी सदिच्छा से चलता है। लेकिन हम अपनी इच्छाएं थोपने से बाज नहीं आते। सोच लिया कि फलानां शेयर बढेगा तो दूसरों से इसकी पुष्टि चाहते हैं। वही टेक्निकल इंडीकेटर पकड़ते हैं जो हमारी धारणा को सही ठहराते हों। कोई इंडीकेटर उल्टा संकेत देता है तो हम उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ध्यान दें, भाव इंडीकेटर के पीछे नहीं, इंडीकेटर भाव के पीछे चलते हैं। अब वार मंगलवार का…औरऔर भी

नतीजों का दौर अपने उफान पर है। जैसे ही दिसंबर तिमाही का नतीजा आता है, कंपनी के शेयरो में हलचल मच जाती है। उम्मीद के मुताबिक रहे तो बिकवाली चलती है और खराब रहे तो ज्यादा ही निराशा छा जाती है। टीसीएस की बिक्री 33% बढ गई। लेकिन विश्लेषकों की अपेक्षा से कम थी तो उसके शेयर खटाक से 5.6% गिर गए। बीस महीनों में टीसीएस की सबसे तीखी गिरावट। ऐसी गहमागहनी के बीच बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

इसे लिक्विडिटी कहें या सस्ते विदेशी धन का प्रवाह। इसी ने अमेरिका व जापान समेत दुनिया भर के शेयर बाज़ारों को चढ़ा रखा है। इसका अर्थव्यवस्था की मूल ताकत से खास लेनादेना नहीं। कुल विश्लेषक इसे अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा किया गया मैनिप्युलेशन बता रहे हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में धनबल के दम पर ऐसी धांधली चलती रहती है। जब सरकारें तक इसमें लगी हों तो इसे कौन रोक सकता है! अब शुक्र की दिशा…औरऔर भी

कोल इंडिया ने प्रति शेयर 29 रुपए का अंतरिम लाभांश घोषित किया तो बाज़ार खुलने के कुछ ही पलों में उसका 6.56% बढ़कर 307.85 रुपए पर पहुंचना स्वाभाविक था। क्या आप जानते हैं कि इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड तिथि भले ही 20 जनवरी हो, लेकिन यह 17 जनवरी से एक्स-डिविडेंड हो जाएगा। अगर आज आपने इसे खरीद लिया तभी आप लाभांश के हकदार होंगे। शुक्र को यह सीधे 29 रुपए नीचे खुलेगा। अब गुरु की चाल…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए भावों की दशा-दिशा को कायदे से पढ़ना ज़रूरी है। पर इससे भी ज्यादा ज़रूरी है अपने मनोभावों को पढ़ना। मान लीजिए, आपने कोई स्टॉक पूरी गणना के बाद यह सोचकर खरीदा कि वो यहां से बढ़ेगा। लेकिन वो गिरने लगता है। आपका दिल डूबने लगता है। आप सोचते हैं कि जैसे ही यह उठकर ऊपर आएगा, आप बेचकर निकल लेंगे। दूसरे भी यही सोचते हैं। बेचनेवालों की भरमार, खरीदनेवाले नदारद। अब आज की ट्रेडिंग…औरऔर भी

जिस तरह ओस की बूंदों से प्यास नहीं बुझती, उसी तरह ट्रेडिंग में हर शेयर की तरफ भागने से कमाई नहीं होती। जिस तरह आपका अपना व्यक्तित्व है, उसी तरह हर शेयर का खास स्वभाव होता है। अपने स्वभाव से मेल खाता एक भी स्टॉक चुन लेंगे तो वो आपका फायदा कराता रहेगा। तमाम कामयाब ट्रेडर पांच-दस से ज्यादा स्टॉक्स में ट्रेड नहीं करते। इसलिए वही-वही नाम देखकर बोर होने की ज़रूरत नहीं। अब मंगल का ट्रेड…औरऔर भी

ट्रेडिंग का मकसद है खरीदने-बेचने का ऐसा चक्कर चलाना ताकि हमारे खाते में बराबर धन आता रहे। इसके दो खास तरीके हैं। दोनों के तौर-तरीके अलग हैं। स्विंग ट्रेड में पांच-दस दिन के लिहाज से एक-दो सौदे करते हैं और रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:3 से ज्यादा रखते हैं। वहीं इंट्रा-डे में नियम है कि दिन में कम से कम दस सौदे करने चाहिए और न्यूनतम रिस्क रिवॉर्ड अनुपात 1:2.5 का होना चाहिए। अब नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

आपने पतंग उड़ाई होगी या गौर से किसी को उड़ाते हुए देखा होगा तो आपको पता होगा कि पहले ढील देकर फिर अचानक डोर को खटाखट खींचकर कैसे सामनेवाले की पतंग काट दी जाती है। शेयर बाज़ार में नतीजों के दौरान उस्ताद लोग ऐसा ही करते हैं। इसलिए कम रिस्क उठाकर ट्रेडिंग करनेवालों नतीजों के दिन उस स्टॉक से दूर रहना चाहिए। उस्तादों की लड़ाई में कूदने की बहादुरी का कोई मतलब नहीं। अब शुक्रवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी

ट्रेडिंग में नौसिखिया लोगों को हाथ नहीं डालना चाहिए। यह उन लोगों के लिए है जो बाज़ार की चाल-ढाल और टेक्निकल एनालिसिस को अच्छी तरह समझते हैं। उनके दिमाग में साफ होना चाहिए कि बाज़ार में कौन-कौन सी शक्तियां हैं जिनकी हरकत भावों को उठा-गिरा सकती है। बाज़ार में संतुलन का पूरा नक्शा उनके दिमाग में साफ होना चाहिए। चार्ट में लोगों की भावनाओं को पढ़ सकने की कला उन्हें आनी चाहिए। अब देखें गुरु की चाल…औरऔर भी

चूंकि हमारे शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशक संस्थाएं (एफआईआई) बड़ी दबंग स्थिति में हैं। इसलिए बाज़ार का उठना गिरना इससे भी तय होता है कि डॉलर के मुकाबले रुपए का क्या हाल है। कल डॉलर का भाव 62.30 रुपए पर लगभग जस का तस रहा तो निफ्टी भी ज्यादा नहीं गिरा। हालांकि लगातार पांचवें दिन बाज़ार का गिरना पिछले तीन साल की सबसे बुरी शुरुआत है। पर सुबह दस बजे बाज़ार को बहुत तेज़ झटका लगा कैसे?…औरऔर भी