बॉस से परेशान होकर शेयरों की ट्रेडिंग में उतरना चाहते हैं तो जहां हैं, जमे रहिए क्योंकि यहां भी बॉस आपका पीछा नहीं छोड़नेवाला। बॉस की बॉसगीरी आपको खलती है क्योंकि वो अपनी चलाता है, आपकी राय को कतई तवज्जो नहीं देता। यहां भी अगर आप अपनी चलाने पर तुल गए तो आपकी बरबादी तय है। यहां का बॉस है बाज़ार और आपको उसके हर फरमान का पालन करना पड़ता है। अब रुख गुरुवार की ट्रेडिंग का…औरऔर भी

भेड़चाल से किसी का कल्याण नहीं होता। लेकिन शेयर बाज़ार में हम-आप अमूमन भेड़चाल ही अपनाते हैं। वहीं ट्रेडिंग से कमाई का मंत्र यह है कि आप तब खरीद लें, जब दूसरे खरीदनेवाले हों और तब बेचकर निकल जाएं, जब दूसरे बेचने जा रहे हों। यह करना कतई मुश्किल नहीं है बशर्ते भावों के चार्ट पर ट्रेडरों व निवेशकों के मनोविज्ञान और उनकी भावी चालों को समझना आप सीख लें। इसलिए अभ्यासेन कौन्तेय। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

सब कुछ नया-नया। वित्त वर्ष 2014-15 का आगाज़। अभी तक रिजर्व बैंक साल के शुरू में सालाना मौद्रिक नीति पेश किया करता था। फिर उसी के फ्रेम में तिमाही और बीच में मौद्रिक नीति की मध्य-तिमाही समीक्षा पेश करता था। लेकिन समय की गति इतनी बढ़ गई कि रिजर्व बैंक अब हर दो महीने पर मौद्रिक नीति लाना शुरू कर रहा है। आज वित्त वर्ष के पहले दो महीनों की नीति आएगी। अब आज का स्वागतम ट्रेड…औरऔर भी

अगर आप ट्रेडिंग के लिए खुद को स्विच-ऑन या स्विच-ऑफ नहीं कर सकते, किसी दिन ट्रेडिंग न करने पर आप परेशान हो उठते हैं तो आप ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिस-ऑर्डर का शिकार हैं। मनोविज्ञान में इसे एक तरह का रोग माना गया है। पहले स्वसाधना से खुद को इस रोग से मुक्त करें। तभी जाकर ट्रेड करें। अन्यथा यह रोग आपके एडिक्शन पर सवार होकर आपके तन मन धन सभी को तोड़ डालेगा। अब मार्च की अंतिम ट्रेडिंग…औरऔर भी

जीवन के संघर्ष में जीतने के लिए आशावाद बेहद ज़रूरी है। निवेशकों का पूरा साथ पाने के लिए कंपनियों का आशावादी होना और आशावाद का माहौल बनाए रखना भी जरूरी है। इसीलिए कंपनियां भावी धंधे व मुनाफे का अनुमान पेश करती रहती हैं। पर शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग से कमाई करनी है तो हमें आशावादी नहीं, यथार्थवादी होना पड़ता है। अनुमानों के पीछे की हवाबाज़ी को समझना पड़ता है। अब जानें शुक्र का ट्रेडिंग सूत्र…औरऔर भी

आज मार्च के डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी का दिन है। डेरिवेटिव्स का खेल उस्तादों का है। वे स्टॉक ऑप्शंस व फ्यूचर्स के अलावा निफ्टी तक में खेलते हैं। लेकिन इधर आम लोग भी निफ्टी ऑप्शंस/फ्यूचर्स में खेलने लगे तो धंधेबाज़ चरका पढ़ाने में लग गए हैं। एक ‘विशेषज्ञ’ कहते हैं कि मार्च निफ्टी 6600 से 6700 के बीच निपटेगा। जहां 10-15 अंक पर मार होती है वहां 100 अंकों का दायरा! इनसे बचिए आप। बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

अगर देश ही नहीं, पूरी दुनिया में सर्वे कराया जाए कि बिजनेस न्यूज़ चैनल देखनेवाले कितने लोग ट्रेडिंग से कमाते हैं तो यकीन मानिए कि नतीजा होगा: कोई नहीं, शत-प्रतिशत घाटा खाते हैं। इसका एक कारण यह है कि न्यूज़ जब तक इन चैनलों तक पहुंचती है, तब तक वो बेअसर होकर उल्टी दिशा पकड़ चुकी होती है। दूसरा यह कि यहां न्यूज़ को सनसनीखेज़ बनाने के लिए अतिरंजित कर दिया जाता है। अब बुधवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जान-पहचान बहुतों से होती है। लेकिन गहरी दोस्ती कम ही लोगों से होती है और गाढ़े-वक्त में गहरे दोस्त ही काम आते हैं। यही बात शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग पर भी लागू होती है। जान-पहचान तो आपकी तमाम शेयरों से होनी चाहिए। पर कुछ शेयरों से इतनी तगड़ी पहचान होनी चाहिए कि आप उनकी हर चाल-ढाल और नाज़-नखरे से वाकिफ हों। ट्रेडिंग पचास में नहीं, इन्हीं पांच-दस शेयरों में कीजिए तो मुनाफा कमाएंगे। अब वार मंगल का…औरऔर भी

निवेश के लिए भावों का चार्ट देखना ज़रूरी नहीं। लेकिन ट्रेडिंग करनेवालों का काम इसके बिना नहीं चलता। बहुत से लोग शेयरखान में एकाउंट खुलवाते हैं ताकि उसके साथ उन्हें ट्रेड टाइगर सॉफ्टवेयर मुफ्त में मिल जाए। चार्ट पर टेक्निकल एनालिसिस के सारे संकेतक, जो बीत चुका है, जो निर्जीव है, उसे दिखाते हैं। असली चुनौती जो अदृश्य है, सौदों के पीछे जो लोग है, उन्हें देखने की है। आगे की दृष्टि के साथ करते हैं आगाज़…औरऔर भी

आदर्श स्थिति वो होती कि हर कोई जीतता, मुनाफा कमाता और कोई न हारता, कहीं कोई हैरान-परेशान ट्रेडर नहीं होता। लंबे निवेश में हर किसी के जीतने की स्थिति होती है। लेकिन ट्रेडिंग में तो कतई नहीं। इसलिए जबरदस्त होड़ से भरे इस बाज़ार में आप अपनी गाढ़ी कमाई लगाने से अच्छी तरह समझ लीजिए कि करने क्या जा रहे हैं। जान लें कि आपके सामने उल्टा ट्रेड कौन कर रहा है। अब आगाज़ करें शुक्रवार का…औरऔर भी