पारदर्शिता तो है, देखना आना चाहिए
बाज़ार की स्थिति 10-15 साल पहले से बहुत बदल चुकी है। भागीदारों की संख्या व स्तर के अलावा सबसे बड़ा बदलाव आया है पारदर्शिता का। बाज़ार में क्या-क्या हुआ, सारा कुछ शाम को मुफ्त में हमारे सामने होता है। यही नहीं, बीएसई व एनएसई दोनों ही टेक्निकल चार्ट की सुविधा देते हैं जिसमें हम बीसियों इंडीकेटर डालकर स्टडी कर सकते हैं। बस, हमें इन विशद आंकड़ों व संकेतकों की समझ होनी चाहिए। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी
