बड़ी सलाहकार फर्म है। इंट्रा-डे सलाह के 5000 रुपए महीना लेती है। डेरिवेटिव्स व फॉरेक्स में भी मार करती है। आजमाने के लिए कल मैंने उनकी सलाह ली। इंट्रा-डे में उन्होंने वोल्टास, टाटा मोटर्स व यूनियन बैंक को चुना। स्टॉप-लॉस की नौबत नहीं आई, पर तीनों लक्ष्य से रहे दूर। फिर भी आखिरी एसएमएस में उन्होंने ठोंका कि इन तीन कॉल्स में दिन की कमाई 4153 रुपए। कैसे और कितनी पूंजी पर? सोचते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

बस चंद दिन और। फिर विदेशी संस्थागत निवेशकों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) कहा जाने लगेगा क्योंकि अभी तक देश में इन पर टैक्स लगाने को लेकर जो भी उलझनें थीं, वे अब दूर हो गई है। पूंजी नियामक संस्था, सेबी ने घोषित किया है कि अब देश में सभी तरह के विदेशी निवेशकों पर एक जैसा टैक्स लगाया जाएगा। कंपनी की इक्विटी में 10% तक विदेशी निवेश एफपीआई माना जाता है। करें अब ट्रेडिंग आज की…औरऔर भी

संख्याएं, गणनाएं और सिद्धांत मानव जाति से अपनी सुविधा के लिए बनाए हैं। इनसे सच को कुछ हद तक समझा जा सकता है, उस पर सवारी नहीं गांठी जा सकती। इसलिए कुछ लोग अगर फिबोनाच्ची संख्याओं और इलियट-वेव सिद्धांत का भौकाल बनाकर 61.8%, 38.2% या 23.6% वापसी की बात करते हैं तो वे या खुद मूर्ख हैं या आपको मूर्ख बना रहे हैं। भाव डिमांड और सप्लाई के हिसाब से ही चलते हैं। अब आज का बाज़ार…औरऔर भी

बाज़ार भांति-भांति के ट्रेडरों व निवेशकों की साझा भावना से चलता है। फिर हर स्टॉक अलग-अलग लोगों को अपनी तरफ खींचता है। ऊपर से ब्रोकर, जॉबर, फंड मैनेजर, सिस्टम ट्रेडर व प्रोफेशनल ट्रेडर अपने दांव चलते हैं। साथ ही लाखों ऐसे लोग जिनका पता ही नहीं कि बाज़ार कैसे चलता है। हर दिन इन सबकी भावनाओं से भाव व बाज़ार चलता है। इसे किसी यांत्रिक विधि से नहीं पकड़ा जा सकता। अब करें नए हफ्ते का आगाज़…औरऔर भी

पैसा और पानी हमेशा निकलकर नीचे भागते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा फैल सकें। अमेरिका नोट छाप रहा है, पैसे की लागत/ब्याज दर दबाकर कम रखी है तो वह निकल-निकलकर बाहर भाग रहा है। अब उसने जनवरी से हर महीने 85 अरब डॉलर के बजाय 75 अरब डॉलर के ही नोट छापने का फैसला कर लिया तो अमेरिकी बाज़ार खुश हैं, बाकी मायूस। कल डाउ जोन्स ने नया शिखर बनाया तो सेंसेक्स आया नीचे। क्या होगा आज…औरऔर भी

आप बुरा होना पक्का माने बैठे हों, तब ऐनवक्त पर वैसा न होना आपको बल्लियों उछाल देता है। कल ऐसा ही हुआ। थोक और रिटेल मुद्रास्फीति के ज्यादा बढ़ जाने से सभी मान चुके थे कि रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ा ही देगा। लेकिन उसने मौद्रिक नीति को जस का तस रहने दिया। ग्यारह बजे इसका पता लगने के तीन मिनट के भीतर निफ्टी सीधा एक फीसदी उछलकर 6225.20 पर जा पहुंचा। पकड़ते हैं आज की गति…औरऔर भी

रामचरित मानस की यह चौपाई याद कीजिए कि मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी सोधि के लगन धरी, सीताहरण मरण दशरथ को, वन में विपति परी। जीवन और बाज़ार की यही खूबसूरती है कि वह बड़े-बड़े विद्वानों की भी नहीं सुनता। जहां लाखों देशी-विदेशी निवेशकों का धन-मन लगा हो, भाव हर मिनट पर बदलते हों, वहां बाज़ार को मुठ्ठी में करने का दंभ भला कैसे टिकेगा! इसलिए फायदे के साथ रखें घाटे का हिसाब। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

क्या शेयर बाज़ार में वाकई ऐसे लोग भरे पड़े हैं जो भावनाओं के गुबार में गुब्बारा बन जाते हैं या यह गुबार सिर्फ नई मछलियों को फंसाने का चारा भर होता है? बीते सोमवार को निफ्टी सुबह-सुबह 6670.30 तक उछलकर आखिर में 6363.90 पर बंद हुआ था। वही इस सोमवार तक हफ्ते भर में ही महीना भर पीछे जाकर 6154.70 पर बंद हुआ। भावनाओं के इस खेल में खिलाड़ी कौन है? चिंतन-मनन करते हुए बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी

विदेशी निवेशक (एफआईआई) हमारे बाज़ार के गुब्बारे में हवा भर चुके हैं। करीब महीने पर पहले इकनॉमिक टाइम्स ने एक अध्ययन किया था। सेंसेक्स से ज्यादा एफआईआई हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 16000 पर आ गया और कम हिस्से वाले स्टॉक्स निकाल दिए तो वो 41000 पर चला गया। घरेलू संस्थाओं से लेकर कंपनियों के प्रवर्तक तक बेच रहे हैं, विदेशी खरीदे जा रहे हैं। आखिर क्यों? जवाब जटिल है। अब इस हफ्ते की चाल…औरऔर भी

बाज़ार का सबसे अहम रोल है भावों का सही-सही स्तर पकड़ना। इस काम में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। लेकिन शेयर बाज़ार में है यह बड़ा मुश्किल काम। एक तो यहां हज़ारों दमदार खिलाड़ी हैं। दूसरे भाव हर मिनट पर बदलते हैं। तीसरे यहां पर्दे के पीछे बहुत सारा खेल चलता है। कंपनी प्रवर्तकों, ब्रोकरों व संस्थागत निवेशकों में मिलीभगत रहती है। ऐसी इनसाइडर ट्रेडिंग को रोकने के उपाय तलाशे जा रहे हैं। अब बढ़े ट्रेडिंग की ओर…औरऔर भी